पंचायत व नगरीय निकाय चुनावों में परोक्ष और अपरोक्ष तौर पर गुत्थमगुत्था हुए दोनों बड़े राजनीतिक दल भाजपा और कांग्रेस के प्रबंधन कौशल की परीक्षा की घड़ी फिर आ गई है। मामला 27 जुलाई से होने वाले जिला और जनपद पंचायत अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के चुनाव का है। इसकी जमावट में भाजपा और कांग्रेस के नेता जुटे हैं।

भाजपा ने मंत्रियों को गृह और प्रभार के जिलों में अधिक से अधिक पार्टी समर्थक सदस्यों को अध्यक्ष-उपाध्यक्ष बनाने की जिम्मेदारी दी है। इसके मद्देनजर जिलों में बैठकों का सिलसिला चल रहा है। मान मनौव्वल और अन्य तरीकों को आजमाने में भी गुरेज नहीं किया जा रहा है। भोपाल,सागर समेत कई जिलों में दोनों दल आमने सामने हैं। सागर में मंत्री गोपाल भार्गव, भूपेंद्र सिंह और गोविंद सिंह राजपूत ने कमान संभाली हुई है। वहीं, कांग्रेस के पूर्व मंत्रियों, विधायकों और पार्टी के वरिष्ठ नेता सदस्यों के बीच समन्वय बनाएंगे।

कांग्रेस की ओर से पूर्व मंत्री, विधायक और वरिष्ठ नेता सदस्यों के बीच समन्वय बनाने का काम कर रहे हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ.गोविन्द सिंह भिंड में बैठक कर चुके हैं तो पूर्व मंत्री तरुण भनोत बालाघाट, सिवनी और जबलपुर में चुनाव का काम देख रहे हैं। भाजपा के प्रदेश मंत्री रजनीश अग्रवाल के मुताबिक पार्टी ने जनपद और जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव के लिए पर्यवेक्षक तैनात कर दिए हैं। सभी लोग क्षेत्र में पहुंच गए हैं। वे स्थानीय नेताओं के साथ रणनीति बनाएंगे। 

दो दिन महत्वपूर्ण
प्रदेश की 313 जनपद पंचायत के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का चुनाव दो चरण में 27 और 28 जुलाई को होगा। भाजपा का दावा है कि अधिकांश जनपद पंचायत में उसके समर्थक सदस्य निर्वाचित हुए हैं, इसलिए अध्यक्ष उनका ही बनेगा। वहीं, कांग्रेस भी अपने समर्थकों के अध्यक्ष उपाध्यक्ष बनने की बात कर रही है। दरअसल, चुनाव गैर दलीय आधार पर हुए हैं, इसलिए दोनों दल अपने-अपने दावे कर रहे हैं। वहीं, जिला पंचायत के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष का चुनाव 29 जुलाई को कलेक्टर कराएंगे। इसके लिए निर्वाचित सदस्यों का सम्मेलन होगा। भाजपा और कांग्रेस ने जिला और जनपद पंचायत चुनाव में अपने समर्थकों के अध्यक्ष उपाध्यक्ष बनवाने के लिए वरिष्ठ नेताओं को जिम्मेदारी दी है।