भोपाल: राज्य सरकार ने प्रदेश में ऐसे 925 वन ग्राम चिन्हित तो कर लिये हैं जिन्हें राजस्व ग्राम में दी जाने वाली सरकारी योजनाओं की सुविधा दी जायेगी परन्तु इन्हें वन ग्राम घोषित करने संबंधी एक भी वन ग्राम की अधिसूचना संबंधित वनमंडलों में उपलब्ध ही नहीं है।

वन मुख्यालय की कार्य आयोजना एवं भू-अभिलेख शाखा से जारी अधिकृत जानकारी के अनुसार, 213 वन ग्राम तो ऐसे हैं जिनपके पटवारी मानचित्र एवं खसरा पंजी ही नहीं हैं। मजेदार बात यह है कि वन मंत्री विजय शाह के गृह जिले खण्डवा के वन वृत्त में 14 वन ग्राम ऐसे हैं जिनके खसरा पंजी दर्ज नहीं हैं लेकिन सर्वेयर द्वारा तैयार की गई खसरावार सूची उपलब्ध है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के गृह जिले सीहोर वनमंडल में कठोतिया/राबिबाबाद वन ग्राम के भी यही हाल हैं तथा इसका कोई रिकार्ड उपलब्ध नहीं है जबकि यहां एमपी इको टूरिज्म बोर्ड ने अपना एक पर्यटक गृह बना रखा है।

प्रदेश के वनमंडलों ने अपने रिकार्ड में सिर्फ 219 वन ग्रामों बनाने की अधिसूचनाओं की तिथि की जानकारी रखी है तथा शेष 706 वन ग्रामों के बनने की कोई अधिसूचित तिथि उसके पास दर्ज नहीं है।