भोपाल: राज्य के वन विभाग ने आत्मनिर्भर मप्र के तहत बैतूल के सागौन, तामिया के शहद और पन्ना के आवंले की जीआई (ज्योग्राफिकल इन्डीकेशन्स) टैगिंग करा रहा है। इससे इन वनोपजों को व्यापक बाजार उपलब्ध हो सकेगा।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश के बैतूल जिले में सागौन की गुणवत्ता पूरे भारत में प्रसिध्द है तथा इससे बनने वाले फर्नीचर एवं अन्य वस्तुओं के लिये इसकी बहुत मांग रहती है तथा यह बहुत जल्दी बिक भी जाता है। एक जिला एक उत्पाद योजना के तहत वन विभाग ने बैतूल के सागौन का चयन किया है तथा हाल के पूरक बजट में इसकी नई मद भी खोली गई है। बैतूल का सागौन बाहर न जाये और वहीं इससे फर्नीचर आदि वस्तुयें बनें, इसके लिये उक्त नई मद के तहत बजट दिया जायेगा। इसके लिये बैतूल जिले में एक बुडन क्लस्टर भी बनाया जा रहा है।
पहले यह बुडन क्लस्टर बैतूल जिले के डूडाबोरगांव में बनना था परन्तु अब यह ग्राम कढ़ाई में बन रहा है। यहां की करीब 20 हैक्टेयर भूमि भी एमएसएमई विभाग को बुडन कल्सटर बनाने के लिये हस्तांतरित कर दी गई है।
इस क्लस्टर के विकास हेतु टेण्डर भी जारी हो गये हैं जोकि 30 सितम्बर 2022 को खोले जायेंगे। इसके जीआई टैगिंग के लिये भी कार्य प्रारंभ कर दिया गया है। इसके अलावा, बैतूल में 28 व्यक्तियों को बुड आर्ट वर्क जिसमें सागौन एवं उनके उत्पाद में कार्विन एवं लकड़ी काष्ठ पर नक्कासी कार्य भी शामिल है, का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
इसी प्रकार, छिन्दवाड़ा जिले के तामिया का शहद और पन्ना जिले का आवंला भी अपनी गुणवत्ता की वजह से काफी प्रसिध्द है तथा वन विभाग ने इनकी भी जीआई टैगिंग की प्रकिया प्रारंभ कर दी है। यह प्रक्रिया कन्फेडरेशन आफ इण्डियन इण्डस्ट्री द्वारा की जा रही है। इससे इन तीनों उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध हो सकेगा तथा इनका मूल्य भी अच्छा मिल सकेगा एवं मप्र के लिये यह एक बहुत बड़ी उपलब्धि होगी।