मैनिट परिसर के अंदर 15 दिनों से मौजूद बाघ ने अधिकारियों की नींद उड़ा दी है। अभी तक तो डीएफओ कार्यालय के अधिकारी ही गंभीर थे लेकिन अब वन्य प्राणी मुख्यालय के अधिकारी भी परेशान हो चुके हैं। बीते चार दिनों में अधिकारियों व विशेषज्ञों ने बाघ के मूवमेंट वाले इलाकों का दौरा किया है लेकिन उन्हें बाघ को पकड़ने की रणनीति ही नहीं सूझ पा रही है। सूत्रों के मुताबिक जिसकी वजह से अधिकारियों व विशेषज्ञों ने फिर तय किया है कि फिलहाल बाघ पर नजर रखना ही उचित होगा।

वन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि मैनिट परिसर में दाखिल हुआ पहला ऐसा बाघ है जो शिकार करने, ट्रैप कैमरे में आने, पगमार्क मिलने के बावजूद दिखाई नहीं दे रहा है। घना जंगल है, झाड़ियों व पेड़ों की संख्या अधिक है। जिसके कारण उसे रेस्क्यू करने की योजना नहीं बना पा रहे हैं। उल्लेखनीय है कि वन विभाग ने उसकी निगरानी करने के लिए 60 वन कर्मियों को तैनात किया है।

हाल ही में वन्यप्राणी विभाग मप्र के वरिष्ठ अधिकारी, पशु चिकित्सकों का दल, बाहर से बुलवाए गए जानकार और बाघों पर शोध करने वाले अभ्यर्थियों ने मैनिट परिसर के अंदर उस इलाको का दौरा किया है जहां बाघ की मौजूदगी है लेकिन बाघ के भ्रमण करने के तरीके व प्रत्यक्ष दिखाई नहीं देने के कारण ये सभी पस्त है। 

भोपाल के आसपास कई बाघ

भोपाल के आसपास एक नहीं, बल्कि कई बाघ है जो रातापानी सेंचुरी से आते हैं, भोपाल के जंगल में प्रवेश करते हैं। शिकार करने और कुछ दिन ठहरने के बाद निकल जाते हैं। किसी भी बाघ ने लोगों पर हमला नहीं किया है।

बाघ को रेस्क्यू करने में यह आ रही चुनौती 

  • मैनिट के अंदर 600 एकड़ का वन क्षेत्र है। जिसमें बड़ी झाड़िया, घास, पेड़ है। यदि उसे पकड़ने के लिए हाथी लाए भी गए तो पकड़ा आसान नहीं होगा।
  • यदि हांका डाला तो जरूरी नहीं कि वह मैनिट को छोड़कर मूलजंगल में ही जाएगा, शहर के अंदर भी दाखिल हो सकता है।

अधिकारी व विशेषज्ञों को छका रहा बाघ

  • शुरू से एक ही इलाके में है, ठिकाना नहीं बदल रहा है लेकिन  दिखाई नहीं देता।
  • दिन में दिखाई नहीं देता, रात को घूमता है, मवेशी मारता है, पिंजरे में कैद नहीं होता लेकिन आसपास घूमकर निकल जाता है।