भोपाल: प्रदेश की राजधानी के क्षेत्र में स्थित भोपाल वनमंडल में दो तिहाई क्षेत्र अवैध कटाई से प्रभावित है। इसके अलावा इस वनमंडल के तेरह प्रतिशत भाग पर अतिक्रमण है। यह चौंकाने वाला तथ्य उजागर हुआ है भारतीय वन सेवा के अधिकारी एवं मुख्य वन संरक्षक प्रभात कुमार वर्मा द्वारा वर्ष 2021-22 से 2030-31 के लिये तैयार कार्ययोजना से, इस कार्ययोजना को राज्य शासन की स्वीकृति तो मिल गई है परन्तु अभी केंद्र सरकार ने इसका अनुमोदन नहीं किया है।

भोपाल वनमंडल की उक्त नवीन कार्ययोजना में कहा गया है कि मानव के द्वारा इमारती एवं जलाऊ की स्थानीय पूर्ति एवं व्यापारिक लाभ और अतिक्रमण करने के लिये अवैध कटाई के द्वारा वनों को अत्याधिक क्षति पहुंचाई है। उपजाऊ भूमि वाले क्षेत्रों में अत्याधिक अतिक्रमण हुये हैं। घाटी के मुहाने और गांव से लगे वन क्षेत्रों में इतने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण के कारण हैं : बढ़ती हुये जनसंख्या के लिये खेती की कमी, बढ़ती हुई जनसंख्या के लिये जलाऊ एवं इमारती की मांग एवं मूल्यवान इमारती लकड़ी की कटाई पर व्यापारिक लाभ कमाना।

विगत बीस वर्षों में काफी बड़े वनक्षेत्र को साफकर खेती योग्य बना दिया गया है। आबादी के समीप स्थित क्षेत्रों में लगातार हो रहे अवैध कटाई के कारण वृक्ष बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गये हैं। लगभग दो-तिहाई वन क्षेत्र अवैध कटाई से प्रभावित है और इसमें भी अधिकांशत: स्वयं के उपयोग के लिये ग्रामीणों द्वारा की जा रही निस्तारी कटाई प्रमुख है। वनों से आच्छादित वन क्षेत्रों में सभी जगह अवैध कटाई अधिक होती है।

कार्ययोजना में सुझाव दिये गये हैं कि अवैध कटाई में कमी लाने की तत्काल आवश्यकता है। इसके लिये कड़ी देखरेख, सुरक्षा की आवश्यकता तो है ही, साथ ही परिसरों को और छोटा करने तथा परिसर रक्षक के मुख्यालय पर नाका बनाने की भी तत्काल आवश्यकता है। अवैध कटाई की समस्या पर अंकुश लगाने के लिये अभी हाल ही में चौकी व्यवस्था प्रारंभ की गई है। इस व्यवस्था के अंतर्गत वनरक्षक समूह में चौकी प्रभारी के नेतृत्व में भ्रमण करते हैं। चौकी पर वाहन भी गश्ती के लिये उपलब्ध कराया गया है। प्रारंभिक रूप में इस कार्यवाही के साकारात्मक परिणाम आ रहे है। इस व्यवस्था को समस्त वनमंडल में विशेष रूप से अवैध कटाई से प्रभावित क्षेत्रों में लागू करना अत्यंत आवश्यक है।

इसके अलावा, कार्ययोजना में अतिक्रमण के बारे में कहा गया है कि भोपल वनमंडल में अतिक्रमण की समस्या विकराल रूप धारण किये हुये है। अतिक्रमण से निपटने के लिये कड़ी कार्यवाही की जाने की आवश्यकता है तथा जिन अतिक्रमणों का व्यवस्थापन नहीं किया गया है उन्हें वन क्षेत्र से तत्काल बेदखल किया जाये। वनखंडों की सीमाओं एवं मुनारों की दुर्दशा को देखते हुये समस्त वनखंडों का पुन: सीमांकन तथा सर्वेक्षण तत्काल कराया जाना आवश्यक हैं। कार्ययोजना में आंकड़ों के साथ बताया गया है कि भोपाल वनमंडल का कुल वन क्षेत्र 46 हजार 464.66 हैक्टेयर है जिसमें से 6 हजार 55.67 हैक्टेयर क्षेत्र में अतिक्रमण है जोकि कुल वन क्षेत्र का 13.03 प्रतिशत है।