सरकार बदली और ऐसी बदली की खुद शिवसेना का वजूद ही हिल गया। नतीजा यह हुआ है कि दशहरा करीब आते ही मुंबई के शिवाजी पार्क पर शिवसेना की रैली इस बार झमेले में पड़ गई है। अब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना आरपार के मूड में है। बीएमसी की तरफ से अब तक परमिशन न मिलने से नाराज गुट का कहना है कि जिस तरह 60 के दशक में बालासाहेब ने फिएट कार पर खड़े होकर रैली को संबोधित किया था, उसी तरह उद्धव और आदित्य भी शिवाजी पार्क में घुसकर गाड़ी पर खड़े होकर रैली को संबोधित करेंगे। यही वह सालाना रैली है जिसमें पार्टी की दिशा और दशा तय होती है।

शिवसेना के आक्रामक रुख से प्रशासन और उद्धव ठाकरे के बीच तनाव बड़ रहा है। जानकारों का कहना है कि दशहरा रैली उद्धव ठाकरे और आदित्य के लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न है। खासकर तब, जब बीएमसी चुनाव प्रस्तावित है। सीएम एकनाथ शिंदे गुट खुद को असली शिवसेना के रूप प्रस्तुत कर रहा है, जबकि उद्धव गुट का दावा है कि वह गद्दार हैं। उद्धव गुट किसी तरह अगर दशहरा रैली शिवाजी पार्क में सफल रहा, तो जनता के बीच वह यह संदेश पहुंचाने में सफल रहेगा कि बाला साहेब के वारिस के साथ ही असली शिवसेना वही हैं। इसका सीधा फायदा प्रस्तावित बीएमसी चुनाव में होगा। इस मौके को उद्धव और शिंदे गुट गंवाना नहीं चाह रहा है। 

ठाकरे और शिवाजी पार्क

शिवाजी पार्क और ठाकरे परिवार का दादर के शिवाजी पार्क से पुराना नाता है। शिवसेना नेता मिलिंद वैद्य का कहना है कि पिछले 40 साल से अधिक से इस मैदान पर शिवसेना की दशहरा रैली हो रही है। शिवसेना संस्थापक बालासाहेब ठाकरे के बाद 9 साल से उद्धव ठाकरे ही रैली को संबोधित कर रहे हैं।मगर सरकार के दबाव के कारण बीएमसी परमिशन देने में आनाकानी कर रही है ।ज्ञात हो कि इस इस रैली में भाग लेने के लिए महाराष्ट्र के कोने-कोने से शिवसैनिक मुंबई पहुंचते हैं।