भोपाल: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेशनल पार्क पालपुर कूनो में चीता रिलीज करने के साथ ही सख्त हिदायत दी थी कि मंत्री हो या नेता या फिर कोई और भी उसे चीता के बाड़े के नजदीक न आने दे. बावजूद इसके, एक वरिष्ठ नौकरशाह के मौखिक निर्देश पर मुख्य वन संरक्षक उत्तम शर्मा ने 2 नेशनल इलेक्ट्रॉनिक चैनल को बाड़े के नजदीक 'पीटीसी' करने की अनुमति दे दी. पीटीसी होने के तत्काल बाद ही पीएमओ ने नाराजगी जताई और जांच के आदेश भी दिए.

अब सवाल यह उठ रहा है कि कहीं प्रधानमंत्री मोदी की हिदायत की नाफरमानी करना कार प्रबंधन को महंगा ना पड़ जाए? सूत्रों ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नामीबिया से आए चीता रिलीज करते हुए अपने भाषण में सख्त हिदायत दी थी कि मंत्री हो या फिर कोई यानि किसी को भी चीता के बाड़े के नजदीक आने न दिया जाए. प्रधानमंत्री मोदी के कुनो से जाते ही उनके हिदायत उल्लंघन हो गया.

चीता के कार्यक्रम को कवर करने पहुंचे 2 नेशनल इलेक्ट्रॉनिक चैनल के संवाददाताओं को क्वारंटाइन बाड़े के नजदीक पीटीसी करने की अनुमति दे दी गई. संवाददाता की रिपोर्ट ब्रॉडकास्टिंग होते ही पीएमओ ने अपनी नाराजगी व्यक्त कर दी जांच के आदेश दे दिए. यहां यह भी उल्लेखनीय है कि अन्य राष्ट्रीय चैनलों और राष्ट्रीय समाचार पत्रों के संवाददाता शीर्षस्थ अधिकारियों और पार्क प्रबंधन से मिन्नते और विनती करते रहे किंतु उन्हें बाड़े के नजदीक फटकने तक नहीं दिया गया.

पीएमओ की नाराजगी के बाद जंगल महकमे के टॉप टू बॉटम अफसरों के बीच हड़कंप मच गया. मौखिक आदेश देने वाले नौकरशाह ने फिर सीसीएफ उत्तम शर्मा को डैमेज कंट्रोल करने की हिदायत दी. शर्मा अब लीपापोती में जुट गए हैं. सूत्रों की माने तो इस घटना के बाद से ही पार्क प्रबंधन ने सख्त रवैया अपना लिया है.

फ्रंटलाइन वर्कर के फोटोसेशन में अफसरों की घुसपैठ-

नेशनल पार्क कुनो में हुए ऐतिहासिक कार्यक्रम में प्रधानमंत्री मोदी के मिनट टू मिनट कार्यक्रम में पार्क के फ्रंटलाइन वर्करों के साथ फोटो सेशन का कार्यक्रम शामिल नहीं था. डीजे फॉरेस्ट सीएम गोयल और एनटीसीए के प्रमुख एसपी यादव ने सिर्फ 20 अधिकारियों के साथ प्रधानमंत्री मोदी संग फोटो खिंचाना कार्यक्रम शामिल किया था. एसपीजी की मदद से कुनो के फ्रंटलाइन वर्करों ने प्रधानमंत्री के संग फोटो खिंचवा पाए. दिलचस्प पहलू यह है कि यहां भी सीनियर अधिकारी भी फोटो सेशन के वक्त घुसपैठ करने से बाज नहीं आए.

कूनो में 20,000 से अधिक चीतल मौजूद-

पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ कार्यालय ने बिश्नोई समाज की आपत्ति को खारिज करते हुए बताया कि कूनो में पहले से ही 20,000 से अधिक चीतल मौजूद हैं. दूसरे राज्यों से चीतल लाने की आवश्यकता ही नहीं है. पीसीसीएफ वाइल्डलाइफ ने यह भी स्पष्ट किया है कि राजस्थान से कोई भी चित्र कूनो नहीं लाया गया है. प्रेस को जारी विज्ञप्ति में मुख्यालय का कहना है कि प्रदेश में कई राष्ट्रीय उद्यान और सेंचुरी ऐसे हैं जहां चीतलों की संख्या काफी अधिक बढ़ गई है.

गर्मियों में चारे की समस्या उत्पन्न होती है तो ऐसे जगहों से चीतल को ऐसे राष्ट्रीय उद्यान और सेंचुरी में छोड़ा जाता है जहां इनके चारे की पर्याप्त उपलब्धता होती है. इसके तहत पेंच, वन विहार, बांधवगढ़ नेशनल पार्क और नरसिंहपुर सेंचुरी से चीतलों को निकाल कर कूनो, सतपुड़ा, संजय राष्ट्रीय उद्यान और नौरादेही सेंचुरी में 6000 से अधिक चीतल छोड़े गए हैं.