भोपाल: मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय जबलपुर के कुलपति डॉ. अशोक खंडेलवाल एक बार फिर विवादों की सुर्खियों में है. इस बार सलाहकारों की नियुक्ति को लेकर खबरों  में हैं. डॉक्टर खंडेलवाल पहले ऐसे कुलपति हैं, इन्होंने एक नहीं, दो सलाहकारों को विश्वविद्यालय में मनोनीत किया है. यानी कुलपति डॉक्टर खंडेलवाल अब सलाहकारों के जरिए विश्वविद्यालय प्रशासन चलाएंगे.

आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय कुलपति डॉ अशोक खंडेलवाल ने विश्वविद्यालय के पूर्व कुलसचिव डॉ आरके चौरसिया को अपने सलाहकार के रूप में नियुक्त किया है. इससे पहले निजी ठेका कंपनी में कार्यरत आईटी सेल के व्यक्ति को सलाहकार के रूप में नियुक्त कर चुके हैं.

बताया जा रहा है कि कुलपति सलाहकारों की नियुक्ति के पहले ईसी ( कार्य परिषद के सदस्य ) मेंबरों से अनुमति भी नहीं ली है. जबकि विश्वविद्यालय के नियम कहते हैं कि किसी भी व्यक्ति की पदस्थापना के लिए ईसी मेंबरों की सहमति जरूरी होती है.

सूत्रों का कहना है कि ईसी के सदस्य विश्वविद्यालय के कामकाज में ज्यादा दखलअंदाजी न करें, इसके लिए कुलपति लगातार सलाहकार नियुक्त करते जा रहे हैं. यहां यह भी उल्लेखनीय है कि आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज से लेकर विश्वविद्यालय तक में ऐसे एक्सपर्ट अधिकारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं जिन्हें सलाहकार की जिम्मेदारी दी जा सकती है.

सवाल यह भी उठ रहा है कि ऐसे व्यक्ति को सलाहकार बनाया गया है कि जिनके पुत्र एक निजी विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं. विश्वविद्यालय के छात्र संघ नेता अभिषेक पांडे का आरोप है कि कुलपति विश्वविद्यालय के कामकाज को कम और सलाहकारों की नियुक्ति पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं.