भोपाल: दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से आने वाले चीता के लिए पालपुर कुनो श्योपुर में रेड कारपेट बिछा दिया गया है. वन्यजीवियों को कूनो में चीता के दीदार के लिए 2 हफ्ते और इंतजार करना होगा.
अब यह स्पष्ट हो गया है कि दक्षिण अफ्रीका और नामीबिया से चीता 13 अगस्त को नहीं आ रहे हैं. भारत और प्रदेश के लोगों को 2 हफ्ते और इंतजार करना होगा. इसके दो प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं. पहला, एमओयू की फाइल पर अभी तक दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति के हस्ताक्षर नहीं हो पाए हैं.
दूसरा यह कि भारत से इंपोर्ट करने का परमिट नहीं मिल पाया है. भारत में चीतों के पुनः आगमन का नेतृत्व कर रहे प्रीटोरिया विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक एड्रियन टॉड्रिफ का कहना है कि 'हम अभी भी भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं. हमें कुछ नामिबियाई चीतों के लिए भी अधिक समय की आवश्यकता है क्योंकि उनकी क्वॉरेंटाइन अवधि पूरी नहीं हुई है. चीता मेटा पापुलेशन प्रोजेक्ट मैनेजर विंसेंट वान डेर मेरवे के अनुसार चीतों को सभी वायरल बीमारियों के टीका लगाया जा चुका है.
उन्हें ट्रेंकुलाइज कर माइक्रोचिप भी लगाया गया है. अभी उनको सतत निगरानी में रखा गया है. डॉक्टर और विशेषज्ञों की टीम उनके साथ होगी. यात्रा के दौरान उन्हें जगाने और शांत रखने के लिए एक हल्का अप्लाई कर भी दिया जाएगा, चीता का सफर आसान हो जाए. एक महीने तक चीता को बाड़े में रखा जाएगा उनकी विशेष निगरानी की जाएगी.
कार्यक्रम के अनुसार दक्षिण अफ्रीका से सात नर चीता और 5 मादा चीता भारत भेजा जाना है. इसी प्रकार नामीबिया से भी चार नर और मादा चीता के आने का कार्यक्रम तय है. अभी तक निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार 12 अगस्त को जोहांसबर्ग के ओआर टैम्बो हवाई अड्डे से उड़ाया जाएगा. 13 अगस्त को भारत पहुंचेगा.
तेंदुआ बन सकते हैं सिरदर्द-
चीता स्वागत में की गई तैयारियों के साथ पार्क प्रबंधन के लिए तेंदुआ बड़ा सिरदर्द बन गया है. चीता के लिए बनाए गए बाड़े में चार तेंदुआ और उनके शावक ने अपना ठिकाना बना लिया है. तेंदुए को भगाने के लिए पार्क प्रबंधन 3 दिनों से रात दिन मेहनत कर रहा है किंतु अभी तक उन्हें सफलता नहीं मिली. वन्य प्राणी विशेषज्ञों का मानना है कि पालपुर कूनो में तेंदुए की उपस्थिति से चीता के जीवन पर संकट के बादल मंडराते रहेंगे.
तेंदुआ चीता का शिकार कर सकता है. यहां यह भी उल्लेखनीय है कि वन्य प्राणी विशेषज्ञ बाल्मिक थापर पहले ही तेंदुए और जंगली कुत्तों की उपस्थिति होने से कुनो में चीता के संकट में होने की ओर शासन का ध्यान आकर्षित कर आ चुके हैं. यानी तेंदुए कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चीता शावकों को मारकर जनसख्या को सीमित कर सकते हैं.
इनका कहना-
हां, हम अभी भी भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं. हमें कुछ नामीबियाई चीतों के लिए भी अधिक समय की आवश्यकता है क्योंकि उनके कुछ जानवरों को नामीबिया में अपनी क्वारेंटीन अवधि पूरी करने की आवश्यकता है. यह संभावना है कि अनुवाद में 2 सप्ताह तक की देरी होगी. हमें उम्मीद है कि अगस्त के अंत से पहले चीते भारत में होंगे.
(एड्रियन टॉड्रिफ, वैज्ञानिक प्रीटोरिया विश्वविद्यालय दक्षिण अफ्रीका)