भोपाल: प्रदेश की सहकारी संस्थाओं के चुनाव लम्बे समय से नहीं हो पाये हैं। राज्य सरकार इनमें प्रशासक नियुक्त कर काम चला रही है। लेकिन सहकारी कायदों में प्रावधान है कि सहकारी संस्था का कार्यकाल खत्म होने के बाद एक साल के अंदर इसके निर्वाचन कराये जायें। इसीलिये इस बाध्यता को खत्म करने के लिये सहकारिता मंत्री अरविन्द भदौरिया ने मुख्यमंत्री को नोटशीट भेजकर कहा है कि कायदों में एक साल की बजाये आगामी चुनाव तक का उल्लेख किया जाये।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में सहकारिता का सेटअप स्वरुप पर आधारित है जिसमें शीर्ष संस्था, केंद्रीय संस्था एवं प्राथमिक संस्था शामिल है। राज्य सहकारी संघ के चुनाव पिछले 18 सालों से नहीं हुये हैं जबकि अपेक्स बैंक के चार साल से नहीं हुये हैं। मार्कफेड एवं लघु वनोपज संघ के भी चुनाव नहीं हो पाये हैं। इसीलिये इनके चुनाव में एक साल की बाध्यता खत्म करने की कवायद की जा रही है।
प्रदेश में सहकारी संस्थाओं के चुनाव कराने के लिये सहकारिता निर्वाचन प्राधिकारी बना हुआ है लेकिन वह भी इनके चुनाव नहीं करवा पा रहा है। यदि यह प्राधिकारी सभी संस्थाओं के चुनाव कराये तो इसमें करीब छह से सात माह लग जाता है। चूंकि अगले साल के अंतिम माहों में विधानसभा आम चुनाव होने हैं, इसलिये फिलहाल इन सहकारी संस्थाओं के चुनाव नहीं हो सकेंगे। बशर्ते नगरीय एवं पंचायत आम चुनावों की तरह न्यायालय कोई आदेश न दे दे।
सहकारिता मंत्री की नोटशीट पर सीएम ने सहकारिता विभाग के प्रमुख सचिव को आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिये हैं। यदि इस पर सहमति बनी तो इसके लिये कैबिनेट में प्रस्ताव लाया जायेगा कि एक साल की बजाये आगामी चुनाव तक का प्रावधान किया जाये।
मंडी समितियों के चुनाव भी लंबित हैं :
प्रदेश में कृषि उपज मंडियों एवं जल उपभोक्ता संथाओं के चुनाव भी सालों से नहीं हो पाये हैं। इनके चुनाव के लिये भी कोई गतिविधि सरकार द्वारा अब तक शुरु नहीं की गई है।