भोपाल: राज्य सरकार ने तीन साल बाद प्रवासी श्रमिक की परिभाषा बदल दी है। दरअसल राज्य सरकार ने 4 अगस्त 2020 को प्रवासी श्रमिकों के कल्याण, रोजगार एवं कौशल विकास आदि के संबंध में सुझाव देने हेतु मप्र प्रवासी श्रमिक आयोग गठित करने की अधिसूचना जारी की थी।
इस अधिसूचना में प्रवासी श्रमिक की परिभाषा बताई गई थी कि प्रवासी श्रमिक से अभिप्रेत है- मप्र के ऐसे मूल निवासी जो अन्य राज्य में श्रमिक के रुप में कार्य कर रहे थे तथा 1 मार्च 2020 या उसके बाद मप्र राज्य में वापस लौटे हैं। लेकिन, अब तीन साल बाद यह परिभाषा बदल दी गई है.
तथा कहा गया है कि प्रवासी श्रमिक से अभिप्रेत है- मप्र के ऐसे मूल निवासी जो अन्य राज्य में श्रमिक के रुप में कार्य कर रहे थे तथा 1 मार्च 2020 या उसके बाद मप्र राज्य में वापस लौटे हैं एवं जो वर्तमान में राज्य के अन्य जिलों या अन्य राज्यों में श्रमिक के रुप में कार्य की तलाश में गये हैं तथा नियमित रुप से कार्य के लिये प्रवास पर आते-जाते हैं।
परिभाषा बदलने से आयोग द्वारा की गई सिफारिशों के लाभ के दायरे में ऐसे श्रमिक भी आ जायेंगे जो कोविड काल में वापस लौटने के बाद पुन: अन्य जिलों या राज्यों में रोजगार के लिये चले गये थे।