MP Election 2023: चुनावी समय नजदीक आते ही नेताओं की जुबान भी अपने आप तीखी होने लग जाती हैं. मध्यप्रदेश में भी चुनावी बिगुल बज चुका है. अब समय भी कम है ऐसे में वार-पलटवार का दौर काफी चरम पर हैं. यहीं वजह है कि प्रदेश में ‘जी’ से अब ‘ऐ’ वाली सियासत शुरू हो गई है.

पहले नेता एक-दूसरे पर कटाक्ष करते समय भी नाम के पीछे ‘जी’ लगाना नहीं भूलते थे. लेकिन, अब चुनावी मौसम में भाषा का स्तर किस तरह गिरने लगा है, इसका अंदाजा आप मौजूदा सियासी माहौल से लगाइए.

जब तेरी पार्टी की सरकार थी कमलनाथ- CM शिवराज

दरअसल, कांग्रेस की तरफ से कमलनाथ मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से 18 सालों का हिसाब मांग रहें हैं. इस पर एक कार्यक्रम के दौरान सीएम शिवराज ने कहा, आजकल कमलनाथ मुझसे सवाल पूछ रहे हैं, 18 सालों का हिसाब दो. ‘ऐ’ कमलनाथ जब तेरी पार्टी की सरकार थी, तो गड्ढों में सड़क ढूंढनी पड़ती थी.

शिवराज जी क्यों बौखला रहे हैं- कमलनाथ 

इस बयान के बाद भला कमलनाथ भी कहा पीछे रहने वाले थे. मौका मिला तो बाज़ी मारते हुए जीत के दावें के साथ ट्विटर के ज़रिये सीएम शिवराज पर कटाक्ष करते हुए लिखा, शिवराज जी आपने मेरे लिए कहा, 'तेरी पार्टी की सरकार थी' और भी शब्द बोले जिनका लहजा बेहद अशोभनीय था. आप क्यों इस तरह बौखला रहे हैं?

उन्होंने आगे लिखा, आपने कुछ दिन पहले मुझे गालियां भी दी थी. गालियां देकर कोई जनता का दिल नहीं जीत सकता. माना कि आप हार रहे हैं और बुरी तरह हार रहे हैं, लेकिन ओछी भाषा का इस्तेमाल करने से क्या हासिल होगा? हां, मैं आपको जरूर आश्वस्त करता हूं कि आपकी गालियों के बदले में मेरी ओर से आपको अपशब्द नहीं मिलेंगे. जनता हमारी न्यायाधीश है, वह खुद अच्छे और बुरे की परख कर लेगी और न्याय करेगी.

वैसे, सियासत में ये कोई पहला मौका नहीं हैं जब भाषा की मर्यादा लांघी गई हो. कई मौक़ों पर इससे पहले भी दोनों तरफ से ऐसे बयान सुनाई दे चुके हैं. ख़ैर, चुनावी गर्मी में शुरू हुई बयानबाज़ी मतदान के बाद कम ज़रूर हो जाएगी, तब तक सिर्फ सुनते जाइये.