श्योपुर. मध्यप्रदेश के श्योपुर में बिजली सुधारने के लिए बिजलीकर्मियों को रोज एक के ऊपर एक चढ़ना पड़ता है. प्रदेश में बिजली कंपनियां मीटर रीडिंग से लेकर बिल वसूली तक में हाईटेक हो चुकी हैं, लेकिन कंपनी यहां के कर्मचारियों को ही मूलभूत सुविधाएं मुहैया नहीं करा रहीं. इनके अभाव में उपभोक्ताओं की समस्याएं हल करने के लिए बिजलीकर्मियों को रोज अपनी जान जोखिम में डालना पड़ती है. श्योपुर में बिजली के खंभों पर चढ़ने के लिए सीढ़ियां ही नहीं है, जिसके कारण ऐसी तस्वीर यहां आम बात हो चुकीं हैं.
मटकी फोड़ प्रतियोगिताओं में आपने अक्सर ग्रुप के मेंबरों को एक दूसरे के कंधे पर खड़े होकर मटकी फोड़ते हुए देखा होगा. कुछ ऐसा ही नजारा यहां रोज दिखाई देता है. बिजली लाइन सुधारने वाले कर्मचारी एक दूसरे के कंधे पर पैर रखकर खंबे पर चढ़ते हैं. संसाधनों की कमी से जूझ रहे सिस्टम का यह अजीबो-गरीब श्योपुर जिले के विजयपुर नगर में प्राय: देखा जाता है. यहां बिजली कंपनी के कर्मचारियों को मरम्मत के लिए खंभों पर चढ़ने के लिए सीढ़ी तक उपलब्ध नहीं कराई जा गई है.
सीढ़ी नहीं मिलने की वजह से बिजली कर्मचारियों को एक दूसरे के कंधे पर चढ़कर खंभों पर लगी लाइट और तार आदि को सुधारना पड़ता है. कर्मचारियों के साथ ऐसी सूरत में कभी भी कोई भी बड़ा हादसा हो सकता है. बारिश का समय होने की वजह से करंट फैलने की आशंका बनी रहती है. एक दूसरे के कंधों से संतुलन बिगड़ने पर कर्मचारी के साथ कभी भी कोई अनहोनी घट सकती है.लाइनमैनों की यह समस्या समझते हुए भी कंपनी उन्हें ऐसा जोखिम उठाने के लिए मजबूर कर रही है.