टाइगर को देखकर और उसकी दहाड़ सुनकर हम भयभीत होने लगते हैं किंतु आज यही टाइगर अपने जीवन को लेकर भयभीत हैं. इसके अस्तित्व पर लगातार खतरा मंडरा रहा है. बढ़ते शहरीकरण और सिकुड़ते जंगलों ने जहां बाघों से आज उनका आशियाना छीना है, वही बाघों के साथ क्रूरता बरतने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. वन क्षेत्रों पर भूमाफिया की कुदृष्टि भी बाघों की घटती संख्या के लिए बड़ा कारण साबित हो रही है.
टाइगर के समराज में डिजिटल कैमरे की घुसपैठ और पर्यटन की खुली छूट के कारण तस्कर आसानी से बाघों तक पहुंच रहे हैं. तस्करों के लिए मध्य प्रदेश के जंगल मुफीद माना जा रहा है. चीन में कई देसी दवा, औषधि और शक्तिवर्धक पेय बनाने में बाघ के अंगों के इस्तेमाल के बढ़ते चलन के कारण टाइगरों की तस्करी की जा रही है. नेशनल पार्क और सेंचुरी के आसपास के बस्तियों के कुत्तों से बीमारी फैलने का खतरा बढ़ रहा है.
टाइगर की मौत के प्रमुख कारणों में टेरीटरी के लिए आपसी संघर्ष, करंट, रेल रोड एक्सीडेंट और जहर देकर मारने के कारण भी सामने आए हैं. इन सबके बाद भी भारत सरकार टाइगर के संरक्षण पर विशेष जोर दे रही है. शायद यही वजह है कि फॉरेस्ट के आला अफसर और पर्यावरणविदों अनुमान है कि भारत में टाइगर की संख्या दुगनी हो सकती है. 2022 में हुई गणना के परिणाम 29 जुलाई तक आने का अनुमान है. वर्तमान में भारत में टाइगरों की संख्या 2968 है. इनमें सबसे अधिक 526 बाघ मध्य प्रदेश में पाए जाते हैं.
विश्व में बाघों की स्थिति-
विश्व में बाघों की संख्या की बात की जाए तो भारत विश्व में पहले स्थान पर है. यहां विश्व भर के 74 फीसदी बाघ पाये जाते हैं. भारत में बाघों की कुल संख्या 2968 हैं. किसी भी देश की टाइगर पापुलेशन ग्रोथ हर साल 9% से थोड़ी कम होनी चाहिए. भारत की यह ग्रोथ रेट 9% से ऊपर की है. ग्रोथ रेट से 2022 तक बाघों की आबादी आसानी से डबल हो जाएगी. भारत के बाद दूसरा स्थान रूस का है, यहां 433 बाघ हैं. इस कड़ी में साइबेरिया में 371, मलेशिया में 250, नेपाल में 198, थाईलैंड में 189, बांग्लादेश में 106, भूटान में 103 हैं.
ऐसा नहीं है कि विश्व भर में बाघों की संख्या में इजाफा हो रहा है. कुछ देश ऐसे भी हैं, जिनमें 2010 से 2014 के बीच बाघों की संख्या में कमी आई हैं. यह देश कंबोडिया, लाओस, वियतनाम बांग्लादेश हैं. बांग्लादेश में बाघों की संख्या 440 थी, जो घटकर 106 पर आ गई है. कंबोडिया एक ऐसा देश है, जहां बाघ पूर्णत: विलुप्त हो गया.
क्यों घटती जा रही है संख्या-
पर्यावरण विदों का मानना है कि बाघों की संख्या घटने के लिए मानवीय हस्तक्षेप ज्यादा जिम्मेदार है.
* पर्यावरण में बढ़ते प्रदूषण की वजह से होने वाला क्लाइमेट चेंज और टाइगर के रहने योग्य जंगलों की कमी.
* टाइगर रिजर्व में बाघों की संख्या बढ़ रही है. इसके कारण टेरिटरी को लेकर आपसी फाइट की घटनाएं बढ़ रही है और बाघों की मौत हो रही है.
* जंगलों में पानी के अभाव के कारण अक्सर टाइगर मानव बस्तियों तक आने के लिए विवश हो रहे हैं इसके चलते वे मानव गुस्से का शिकार हो रहे हैं.
बाघों की मौत के आंकड़े-
2022- 108
2021-127
2020-106
2019- 96
2018- 101 (एनटीसीए के अनुसार)
इसलिए जरूरी है बाघों का संरक्षण
बाघ परिस्थितिकी तंत्र और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. बाघ श्रेष्ठ शिकारी के रूप में पर्यावरण को स्वस्थ रखने में मदद करता है. परिस्थितिकी तंत्र में अगर टाइगर ना हो तो घास खाने वाले जंतुओं की संख्या बढ़ जाएगी, जिससे कि मानव के लिए भोजन का संकट उत्पन्न हो जाएगा.
इन वजहों से बाघों का संरक्षण हमारा दायित्व एवं कर्तव्य है. पिछले चार दशकों में सरकारें और विशेषज्ञ बाघ संरक्षण की और छोटे छोटे कदम बढ़ा रहे हैं और उसी का फल है कि भारत समेत एशिया के 12 देशों में बाघों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है.
भारत में सबसे अधिक बाघ मध्यप्रदेश में..!
भारत में 2968 टाइगर है. 1492 बाघ मध्य प्रदेश, कर्नाटक और उत्तराखंड में है. इनमें सबसे अधिक बाघ 526 मध्य प्रदेश में पाए जाते हैं. यहां बाघों की आबादी 70% बढ़ी है. जबकि कर्नाटक की 68% की ग्रोथ रही है. यही वजह है कि मध्यप्रदेश को टाइगर स्टेट का दर्जा दिया गया है. मध्य प्रदेश का बेस्ट टाइगर रिजर्व और केरल का पेरियार सेंचुरी देश के सबसे अच्छे टाइगर रिजर्व है.
कहां कितने टाइगर-
मप्र - 526
कर्नाटक - 524
उत्तराखंड -442
महाराष्ट्र- 312
तमिलनाडु - 264
केरल - 190
असम - 190
उप्र - 173 (2018 की गणना अनुसार)
मप्र में क्षेत्रफल से अधिक बड़ी बाघों की आबादी-
मध्यप्रदेश में टाइगर की आबादी तेजी से बढ़ रही है. नेशनल पार्क के क्षेत्रफल बढ़ती आबादी के कारण टाइगर की टेरिटरी छोटी पड़ने लगी हैं.
नेशनल पार्क क्षेत्रफल संख्या
कान्हा - 2117 - 104
बांधवगढ़ - 1530 - 124
पेंच - 1179 - 87
पन्ना - 1597 - 31
सतपुड़ा - 2133 - 47
संजय - 1644 - 06