भोपाल: प्रदेश के टाईगर रिजर्व संचालक एवं अन्य अभ्यारणों के वनाधिकारी वन अपराधों में पकड़े गये आरोपियों की जानकारी विभागीय पोर्टल पर दर्ज नहीं कर रहे हैं। भोपाल स्थित पीसीसीएफ वन्य प्राणी जसवीर सिंह चौहान ने इस पर कड़ी आपत्ति की है तथा उन्हें पोर्टल पर जानकारी डालने के लिये चेताया है।

चौहान ने सभी क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक, टाईगर रिजर्व के क्षेत्र संचालकों, सिंह परियोजना एवं माधव राष्ट्रीय उद्यान शिवपुरी के मुख्य वन संरक्षक को पत्र लिखकर कहा है कि वन मुख्यालय की आईटी शाखा द्वारा दो विभागीय वेब पोर्टल फारेस्ट आफेन्स मेनेजमेंट सिस्टम-एफओएमएस एवं आफेन्डर डाटा बेस्ड मेनेजमेंट सिस्टम-ओडीबीएमएस साफ्टेवयर वन एवं वन्यप्राणी अपराध प्रकरणों तथा इसमे लिप्त आरोपियों की जानकारियों के सांधारण हेतु तैयार किये गये है। उक्त साफ्टेवयर में आपके कार्यक्षेत्र में दर्ज समस्त अपराध प्रकरणों की जानकारी सतत् रूप से अपलोड किया जाना अपेक्षित है।

चौहान ने पत्र में कहा कि पोर्टल पर डाली जाने वाली उक्त जानकारी विभाग व शासन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके आधार पर समय-समय पर लोकसभा, राज्यसभा व विधानसभा के प्रश्नों के जवाब तैयार करने में, सूचना के अधिकार के अंतर्गत प्राप्त आवेदनों के निराकरण में तथा वन अपराध अन्वेषण कार्य व संबंधित न्यायालयीन कार्य के प्रभावी संपादन में अत्यंत उपयोगी है। परन्तु समीक्षा करने पर यह पाया गया कि आप लोगों के द्वारा उक्त दोनों साफ्वेयर में जानकारी सतत् रूप से दर्ज नही की जा रही है।

प्रदेश में दर्ज वन अपराध व लिप्त आरोपियों संबंधी समस्त जानकारी एसटीएफ पुलिस एवं केन्द्र सरकार की वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यरो नई दिल्ली को रियल टाइम में भी साझा किये जाने का निर्णय लिया गया है। इस हेतु उक्त साफ्टवयर का डाटा को संबंधित एजेन्सी के द्वारा भी एक्सेस किया जावेगा। जिससे प्रदेश में वन अपराध के विरूद्ध संयुक्त प्रयास से प्रभावी नियंत्रण किया जा सके। इसलिये शीधताशीध्र विभागीय वेब पोर्टल के दोनों साफ्टेवयर एप्लीकेशन पर जानकारी सतत् अपलोड किया जाये।

डाटा अपलोड की यह है स्थिति :

प्रदेश के 24 वन वृत्तों/टाईगर रिजर्व में अब तक घटित हुये वन अपराधों के अंतर्गत एफओएमएस पोर्टल पर कुल 6 लाख 14 हजार 484 वन अपराध दर्ज किये गये हैं जिनमें से 9 हजार 309 शिकार वाले अपराध हैं लेकिन इसमें जहां आरोपियों की संख्या 1 लाख 63 हजार 819 बताई गई है वहीं ओडीबीएमएस पोर्टल पर आरोपियों की संख्यार मात्र 16 हजार 478 ही दर्शाई गई है।

उल्लेखनीय है कि वन मुख्यालय की आईटी शाखा ने पुलिस की एफआईआर सिस्टम की तरह ही वन संबंधी अपराधों में दर्ज की जाने वाली प्रिलिमनी आफेन्स रिपोर्ट-पीओआर ऑनलाईन दर्ज करने के लिये साफ्टवेयर बनाया हुआ है परन्तु इसके बाद भी वन अपराध की पीओआर ऑनलाईन नहीं काटी जा रही है तथा इसे मेनुअली भौतिक रुप से दर्ज किया जा रहा है और बाद में इन साफ्टवेयर में इन्हें अपलोड किया जाता है।

यही नहीं, जिस प्रकार पुलिस विभाग ने अपनी एफआईआर, चालान को अभियोजन अधिकारियों, न्यायालय, फोरेन्सिक जांच आदि से जोडऩे के लिये आईसीजेएस यानि इंटर आपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम का पोर्टल बना रखा है, उससे वन अपराधों को नहीं जोड़ा गया है जबकि इसे जोड़ा जाना चाहिये।