MP Election 2023: मध्यप्रदेश में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में भारतीय जनता पार्टी आज (20 अगस्त) अपना रिपोर्ट कार्ड जारी करने जा रहीं हैं. जिसे लेकर प्रदेश की सियासत में हलचल शुरू हो गई.
ऐसा इसलिए क्योंकि रिपोर्ट कार्ड पेश करने खुद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार के दिन राजधानी भोपाल आ रहे हैं. तय कार्यक्रम के मुताबिक, अमित शाह दोपहर 12.10 बजे भोपाल एयरपोर्ट पहुंचेंगे. फिर वहां से रवाना होकर करीब 12.25 बजे कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में रिपोर्ट कार्ड जारी करेंगे.
इसके बाद दोपहर 2.40 बजे भोपाल एयरपोर्ट से ग्वालियर के लिए रवाना होंगे. ग्वालियर में करीब 3.55 बजे जीवाजी विश्वविद्यालय में बने अटल सभागार में प्रदेश कार्यसमिति की बैठक करेंगे. इस बैठक के बाद रात 7.45 बजे ग्वालियर से दिल्ली के लिए रवाना होंगे.
बीजेपी इस रिपोर्ट कार्ड के ज़रिये 15 महीने की कमलनाथ सरकार के कार्यकाल को छोड़ दे तो करीब 2003 से 2023 तक के 18 सालों के शिवराज सरकार के कार्यकाल में हुए विकास कार्यों का रिपोर्ट कार्ड जारी करेंगी.
रिपोर्ट कार्ड के ज़रिये यह बताने का प्रयास हैं कि बीजेपी सरकार में किसानों, मजदुरों, गरीबों, महिलाओं, युवाओं और बुजुर्गों के लिए कितना काम हुआ हैं. सरकार ने कौन-कौन सी योजना लागू कर हर वर्ग को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया है. यह आयोजन कुशाभाऊ ठाकरे इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर में होने जा रहा है.
कांग्रेस ने बीजेपी पर साधा निशाना-
रिपोर्ट कार्ड जारी होने से पहले ही कांग्रेस की तरफ से पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने बीजेपी पर निशाना साधा हैं. ट्विटर के ज़रिये कमलनाथ ने हमला बोलते हुए लिखा, सुना है आज भारतीय जनता पार्टी मध्य प्रदेश में किए गए कामों का हिसाब देने वाली है. लेकिन, जनता चाहती है कि झूठे कामों का हिसाब देने के बजाय असली करतूतों का हिसाब दिया जाए.
उन्होंने आगे लिखा, 50% कमीशन राज चलाने वाली भाजपा अपने हिसाब पत्र में जनता को बताएं. इन्वेस्टर समिट का हिसाब, 33 लाख करोड़ की निवेश घोषणाओं का हिसाब, महिला अपराध में नंबर 1 रहने का हिसाब, बाल अपराध में नंबर 1 होने का हिसाब, बुजुर्ग अपराध में नंबर 2 होने का हिसाब, आदिवासी अत्याचार में नंबर 1 होने का हिसाब, दलित अत्याचार का हिसाब. साढ़े तीन लाख करोड़ के कर्ज का हिसाब. घोटालों का हिसाब, 50% कमीशन का हिसाब, 25000 घोषणाओं का हिसाब, बेरोजगारी का हिसाब. महंगाई का हिसाब, किसान के कर्जदार होने का हिसाब, ओबीसी के साथ अन्याय का हिसाब, गरीबों को अनाज न मिलने का हिसाब. बदहाल शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था का हिसाब.
कुल मिलाकर जैसे-जैसे चुनाव की तारीख नजदीक आती जा रही है. वैसे-वैसे चुनावी रणभूमि में वार-पलटवार का दौर भी तीख़ा ही होता जा रहा हैं. हालांकि, चुनाव जीतने के लिए सारी कोशिश आजमाने में भी दोनों ही दल पीछे नहीं हैं.