मकर संक्रांति के मौके पर पतंगबाज़ी करने की भी विशेष परंपरा है। इस दिन पूरा आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। कोई अपने घर की छत से पतंग उड़ता है तो कोई मैदानों में पहुचकर पतंग उड़ाता है। आसमान छूती पतंगें तो कभी पेंच लड़ती पतंगें सच में ये नज़ारा रोमांच से भर देता है। बाज़ार में भी रंग बिरंगी हर तरह की पतंगें मिल जाया करती हैं। जिनमें बच्चों के फेवरेट कार्टून करेक्टर से लेकर रामायण और महाभारत तक के किरदार देखने को मिल जाते हैं।
पतंग उड़ाने को लेकर इन दिनों बड़ो से ज़्यादा बच्चों में क्रेज देखा जा सकता है। कन्नी बांधना, चरखी और पतंग लेकर मैदान में अपनी पतंग लेकर पहुंच जाने को लेकर बच्चे खासे एक्साइटेड रहते हैं लेकिन अगर आप पतंगबाज़ी का शौक रखते हैं, तो आपको इससे जुड़े नियम और कानून भी पता होना चाहिए।
सुबह और शाम को पतंगबाजी प्रतिबंधित है। गृह विभाग ने सभी कलेक्टरों को धारा 144 के तहत पतंगबाजी पर रोक लगाने को कहा है। नियमानुसार सुबह 6 बजे से 8 बजे और शाम 5 से 7 बजे के बीच पतंग नहीं उड़ाई जा सकती है।
अलावा इसके अगर आप चाइनीज मांझा बेचते और खरीदते पाए जाते हैं तो भी आप पर कानूनी कार्रवाई हो सकती है। चाइनीज मांझा इंसानों के साथ-साथ आसमान में उड़ने वाले मूक पक्षियों के लिए भी खतरनाक साबित हो सकता है।
आप सोच रहे होंगे कि ये मांझा इतना खतरनाक क्यों है और एक पतला सा धागा लोगों की जान कैसे ले सकता है? क्योंकि पतंग उड़ाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली सामान्य डोरी कपास से बनी होती है, लेकिन चाइनीज डोर नायलॉन और अन्य सिंथेटिक सामग्री से बनी होती है। इन मांजों पर कांच, लौह चूर्ण और कई अन्य रसायनों की परत चढ़ाई जाती है। इससे मांजा और भी गंभीर और जानलेवा हो जाता है।
चाइनीज मांझा सामान्य मांझे की तुलना में अधिक लचीला होता है, अर्थात यह टूटने के बजाय लगातार खिंचता रहता है। इतना ही नहीं, चाइनीज मांजा में धातु के पाउडर का इस्तेमाल इसे बिजली का अच्छा सुचालक बनाता है, यानी इसमें करंट प्रवाहित हो सकता है और इसलिए बिजली के झटके का खतरा होता है, लेकिन इसके खतरों के बारे में जागरूकता के बावजूद इसका व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है। आज बाजार में मांग है, क्योंकि जब लोग पतंग उड़ाते हैं तो वे चाहते हैं कि उनकी पतंग कटे नहीं और वे दूसरों की अधिक से अधिक पतंगें काट सकें।