देशभर में नवरात्रि पर्व की धूम है। नवरात्रि की महाष्टमी आज मनाई जा रही है। नवरात्रि की अष्टमी व नवमी तिथि का विशेष महत्व होता है। इन दोनों तिथियों में हवन पूजन के साथ कन्या पूजन किया जाता है।
शारदीय नवरात्रि की अष्टमी तिथि को महाष्टमी के नाम से जानते हैं। नवरात्रि के आठवें दिन यानी अष्टमी तिथि को मां महागौरी की पूजा कर कन्या पूजन भी किया जाता है।
हिंदू पंचांग के अनुसार, अष्टमी तिथि पर हवन पूजन का सबसे सर्वोत्तम मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 10 मिनट तक रहेगा।
आज के दिन मां महागौरी के पूजन से हर पाप कर्म से छुटकारा मिलता है। इस बार महाअष्टमी पर बने शुभ योग से आज की पूजा का फल दोगुना हो जाता है.
वृषभ पर सवार मां महागौरी का रंग गौर है, इसी वजह से देवी के इस स्वरूप को महागौरी कहा जाता है। महागौरी करुणामयी, स्नेहमयी, शांत और मृदुल स्वभाव वाली हैं। इन्हें धन ऐश्वर्य प्रदायिनी, शारीरिक मानसिक और सांसारिक ताप का हरण करने वाली मां बताया गया है।
पूजा विधि
महा अष्टमी पर घी के दीपक से मां महागौरी का आव्हान करें और मां को रोली, मौली, अक्षत, मोगरा पुष्प अर्पित कर, लाल चुनरी में सिक्का और बताशे रखकर चढ़ाए. नारियल से बनी मिठाई का भोग लगाएं. मंत्रों का जाप करें और अंत में मां महागौरी की आरती करें.
बीज मंत्र - श्री क्लीं ह्रीं वरदायै नम:
प्रार्थना मंत्र - श्वेत वृषे समारूढ़ा श्वेताम्बरधरा शुचि:। महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा॥
आज के दिन तुलसी या लाल चंदन की माला से मां महागौरी के बीज मंत्र का 1100 बार जाप करें इससे समस्त सिद्धियां प्राप्त होती हैं.
कन्या पूजन
देवी पुराण में अष्टमी या नवमी वाले दिन कन्या पूजन (कंजक पूजन) करने से देवी मां बेहद प्रसन्न होती हैं. आज अष्टमी या कल यानी नवमी तिथि पर 9 कन्याओं के पूजन का विशेष महत्व होता है। पुराणों के मुताबिक कन्या पूजन के लिए 3 से 9 वर्ष तक की कन्याओं को ही आमंत्रित करना चाहिए।