भोपाल: कांग्रेस हाई कमान के एक मापदंड तय किए जाने के बाद से प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ के करीबी संजय मसानी, पंडित मुकेश नायक, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष अरुण यादव और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी के समर्थक सहित करीब दो दर्जन से अधिक नेता टिकट की दौड़ से बाहर कर दिए गए हैं. 

कांग्रेस हाई कमान ने यह तय किया है कि 20,000 से अधिक मतों के अंतर से हारे नेताओं को दोबारा टिकट नहीं दिया जाएगा. एक या दो प्रकरणों पर अपवाद स्वरूप विचार किया जा सकता है. 

पिछले दिनों नई दिल्ली में हुई कांग्रेस स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में टिकट वितरण के लिए क्राइटेरिया तय किए गए. इसमें यह भी तय किया गया कि लगातार तीन चुनाव हारे नेताओं को भी इस बार टिकट नहीं दिया जाएगा. यहां इस बात का उल्लेख करना उचित होगा कि पार्टी द्वारा बनाए गए क्राइटेरिया में अनफिट हुए प्रदेश अध्यक्ष कमलनाथ के करीबी संजय मसानी पिछले विधानसभा चुनाव में वारासिवनी (बालाघाट) विधानसभा क्षेत्र से 45998 मतों के अंतर से हारे थे. 

यही नहीं, वहां उनकी जमानत भी जप्त हो गई थी. मसानी के चुनावी मैदान में उतरने के कारण पार्टी के क्षेत्रीय क्षत्रप एवं ताकतवर नेता एवं विधायक प्रदीप जायसवाल ने पार्टी छोड़ दी. अब यही मसानी उदयपुरा विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के विधायक देवेंद्र पटेल के खिलाफ माहौल बना रहे हैं. इसके लिए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ ने भी उन्हें टोका-टाकी नहीं की है. मसानी को लेकर चर्चा यह भी है कि वह बीजेपी के लिए जासूसी का काम कर रहे हैं.

अब पचौरी चुनेंगे भोजपुर से जिताऊ उम्मीदवार-

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेश पचौरी ने पहले ही चुनाव लड़ने से मना कर दिया है. कांग्रेस के अनुकूल लहर में भी सुरेश पचौरी अपने गृह क्षेत्र भोजपुर विधानसभा क्षेत्र से 29,000 से अधिक मतों से हार गए थे. पार्टी ने उन्हें स्क्रीनिंग कमेटी का मेंबर बनाकर जिताऊं उम्मीदवार के चयन की जिम्मेदारी सौंपी है. 

पिछले दिनों दिल्ली में हुई बैठक में पचौरी ने अपने भोजपुर विधानसभा क्षेत्र से दावेदारी कर रहे राजकुमार पटेल के नाम पर असहमति जताई है. इसी प्रकार उन्होंने नरेला विधानसभा क्षेत्र से दावेदारी कर रहे मनोज शुक्ला की भी मुखालफत की है. अरुण यादव भी विधानसभा चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं है. 

कांग्रेस ने 2018 के चुनाव में अरुण यादव को मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के खिलाफ बुधनी विधानसभा क्षेत्र से उतारा था. यादव बुधनी विधानसभा क्षेत्र से 58999 मतों के अंतर से हारे थे. 2023 विधानसभा चुनाव में भी कांग्रेस के पास शिवराज सिंह के खिलाफ चुनावी मैदान में उतारने के लिए कोई दमदार उम्मीदवार नहीं है.

20,000 से अधिक मतों के अंतर से हारने वाले कांग्रेस के प्रमुख नेता-

नेता के नाम                           हार का अंतर

संजय मसानी                        45998
विश्वेश्वर भगत                       44775
शंकर प्रताप सिंह                   43897
अरुण सुभाष चंद्र यादव          58998
संम्मत्ति सैनी                         43673
सुरेश पचौरी                          29486
पंडित मुकेश नायक                23680
डॉ महेंद्र सिंह                         23151
आलोक मिश्रा                       26585
निलेश अवस्थी                      26712
कमलेश साहू                        27242
ठाकुर जय सिंह                     27987
रमाशंकर प्यासी                    26315
सुरेंद्र सिंह ठाकुर                   20644

महिला, युवा और पिछड़े वर्ग से 50% टिकट-

पिछले दिनों दिल्ली में संपन्न स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में विप निर्णय किया गया कि  महिला, युवा और पिछड़े वर्ग का प्रतिनिधित्व करने वाले 50% नेताओं को टिकट दिया जाएगा. इस निर्णय से युवाओं और महिलाओं में टिकट की आशा जगी है. 

यहां यह भी उल्लेख करना उचित होगा कि कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 'महिला हूं लड़ सकती हूं', का नारा बुलंद किया था. स्क्रीन कमेटी की बैठक में लिए गए निर्णय के बाद महिला नेत्रियों को उम्मीद है कि पिछले विधानसभा चुनाव की तुलना में इस बार महिलाओं को अधिक टिकट मिल सकती है.

अजय सिंह की टिकट को लेकर असमंजस-

स्क्रीनिंग कमेटी के क्राइटेरिया में यह भी तय किया गया है कि लगातार तीन चुनाव हारे नेताओं को टिकट नहीं दिया जाएगा. इस मापदंड के बाद से पूर्व नेता प्रतिपक्ष और विंध्य के कद्दावर नेता अजय सिंह के टिकट पर असमंजस के बादल मंडराने लगे है. अजय सिंह लगातार तीन चुनाव हारे हैं. 

इसमें दो लोकसभा चुनाव और एक विधानसभा चुनाव शामिल है. अब पार्टी की सीईसी कमेटी को यह तय करना है कि तीन बार चुनाव में लोकसभा की हार शामिल होगी या नहीं. क्या विधानसभा के चुनाव में लगातार तीन बार हारे नेताओं पर यह क्राइटेरिया लागू होगा?