भोपाल: पिछले दस सालों में वन अधिनियम 1927 एवं वन्यप्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत जंगलों में रहने वाले आदिवासियों पर राज्य के वन विभाग ने कुल 32 हजार 758 प्रकरण दर्ज किये हैं जिनमें से 24 हजार 360 प्रकीरण निराकृत हो गये हैं जबकि वन विभाग के पास 3 हजार 852 प्रकण अभी भी लंबित पड़े हुये हैं। न्यायालय में विचाराधीन प्रकरणों की संख्या 4 हजार 546 है।
वन विभाग ने राज्यपाल को सौंपी एक रिपोर्ट में उक्त जानकारी दी है। इस रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले साल वन विभाग के पास आदिवासियों के वन अपराध संबंधी लंबित प्रकरणों की संख्या 8 हजार 389 थी परन्तु वन मुख्यालय से निरन्तर संदेशों के बाद 4 हजार 537 प्रकरणों का निराकरण कर दिया गया।
बनाई कार्ययोजना :
वन विभाग ने लंबित 3852 प्रकरणों के आगामी 3 माह में निपटारे के लिये कार्ययोजना बनाई है। 39 जिलों में लंबित प्रकरण सौ तक हैं जिन्हें एक माह में निपटाया जायेगा जबकि 12 जिलों में 100 से 300 प्रकरण लंबित हैं ज्रिहें 2 माह में निराकृत किया जायेगा। सिर्फ 1 जिले में लंबित प्रकरण 300 से अधिक हैं जिन्हें 3 माह में निपटाया जायेगा। यह जिला बुराहनपुर है जहां 513 प्रकरण लंबित हैं। जो प्रकरण न्यायालय में लंबित हैं, उनके शीघ्र निपटारे के लिये शासकीय अधिवक्ताओं से कहा जा रहा है।