भोपाल: राज्य के चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मप्र स्वशासी चिकित्सा एवं दंत चिकित्सा महाविद्यालय स्नातक प्रवेश परीक्षा नियम 2017 में बदलाव कर दिया है। अब चिकित्सा महाविद्यालय में प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को 500 रुपये के नॉन जुडिशियल स्टाम्प पेपर पर नोटरी द्वारा सत्यापित बाण्ड भरकर देना होगा।
मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के लाभान्वित अभ्यर्थी को बांड में लिखना होगा कि वह दो साल तक शासन द्वारा नियत किये गये स्थल पर चिकित्सा सेवा देगा जबकि बिना मेधावी योजना वाले अभ्यर्थी के लिये यह सेवावधि 1 साल रहेगी।
दोनों ही वर्ग के विद्यार्थियों के लिये प्रावधान रखा गया है कि शासन द्वारा नियत स्थान पर निर्धारित समयावधि तक सेवा न देने पर वे दस लाख रुपये का भुगतान करेंगे, हालांकि अजाजजा एवं ओबीसी वर्ग के लिये बांड की यह राशि 5 लाख रुपये रखी गई है। बांड में यह भी लिखा रहेगा कि बांड के प्रावधानों का उल्लंघन होने की दशा में मप्र मेडिकल काउन्सिल में किया गया उसका रजिस्ट्रेशन निरस्त करने संबंधी कार्यवाही का अधिकार शासन को रहेगा।