पर्यावरण संरक्षण को लेकर अब लोग जागरुक होने लगे हैं। गणेश उत्सव पर घरों में आमतौर पर पीओपी की प्रतिमाओं की स्थापना की जाती थी, लेकिन अब लोग जागरुकता का परिचय देते हुए मिट्टी की प्रतिमाएं स्थापित कर घरों में ही विसर्जन करने लगे हैं। पिछले साल भी शहर में मिट्टी की गणेश प्रतिमाओं की स्थापना पूरे शहर में की थी। इस बार भी घरों में मिट्टी के गणेश की स्थापना की जाएगी। इसके लिए विभिन्न सामाजिक, धार्मिक संगठनों की ओर से प्रशिक्षण दिया जाएगा, वहीं समाज भी इसे लेकर लोगों को जागरुक कर रहे हैं। गणेश उत्सव की शुरुआत अगले माह 19 सितम्बर से होगी। इसके लिए शहर में जगह-जगह मूर्तिकारों ने पंडाल लगाकर प्रतिमाएं बनाना शुरू कर दिया है। शहर में न्यू मार्केट, करोंद, पुराना शहर, भेल सहित अन्य स्थानों पर मूर्तिकारों ने प्रतिमाओं को आकार देना शुरू कर दिया है।

गायत्री शक्तिपीठ: उपलब्ध कराएगा मिट्टी की प्रतिमा

गायत्री शक्तिपीठ की ओर से गणेश उत्सव के पूर्व नर्मदा की मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाएं लोगों को उपलब्ध कराई जाएगी। गायत्री शक्तिपीठ के अशोक नेमा ने बताया कि इस बार 10 हजार प्रतिमाओं के आर्डर दिए है, इसके साथ ही ईको फ्रेंडली प्रतिमा बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसमें सुपारी, ड्रायफ्रूट आदि से गणेश बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा।