जी-20 समिट के दौरान डिनर के लिए भेजे गए राष्ट्रपति के निमंत्रण पत्र पर छिड़ा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। है। निमंत्रण पत्र में 'प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया' की जगह 'प्रेसिडेंट ऑफ भारत' लिखा है। इसे लेकर विपक्ष के विरोधी तेवर दिख रहे हैं वहीं भाजपा ने विपक्ष की कांग्रेस की नीति नियत को कटघरे में खड़ा किया है।

इस विवाद में अब मध्यप्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा की भी एंट्री हो गई है। उन्होंने कांग्रेस को खरी-खरी सुनाई है। उनका कहना है, कि भारत के नाम पर विपक्ष को आपत्ति क्यों नहीं होगी जिस पार्टी की स्थापना एओ ह्यूम ने की और जो आज भी इटेलियन संस्कृति में ढली हुई पार्टी है। उन लोगों को तो स्वाभाविक रूप से आपत्ति होगी ही। संस्कृति इंडिया की पाले हुए हैं, तो चक्रवर्ती सम्राट भरत के नाम पर रखे गए नाम भारत पर तो आपत्ति होगी ही ना।

विवाद ने उस समय तूल पकड़ा जब G-20 समिट के डिनर के लिए भेजे गए न्यौते पर प्रेसीडेंट ऑफ इंडिया के बजाए प्रेसीडेंट ऑफ भारत गया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने दावा किया है कि जो निमंत्रण पत्र राष्ट्रपति भवन की तरफ से भेजे गए हैं, उनमें आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले 'प्रेसिडेंट ऑफ इंडिया' को बदला गया है। रमेश का दावा है कि इसमें इंडिया शब्द को हटाया गया है और 'प्रेसिडेंट ऑफ भारत' का इस्तेमाल किया गया है।  

इस पर भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने एक्स पर लिखा, "कांग्रेस को देश के सम्मान और गौरव से जुड़े हर विषय से इतनी आपत्ति क्यों है? भारत जोड़ो के नाम पर राजनीतिक यात्रा करने वालों को भारत माता की जय के उद्घोष से नफरत क्यों है? स्पष्ट है कि कांग्रेस के मन में न देश के प्रति सम्मान है, न देश के संविधान के प्रति और न ही संवैधानिक संस्थाओं के प्रति. उसे तो बस एक विशेष परिवार के गुणगान से मतलब है. कांग्रेस की देश विरोधी एवं संविधान विरोधी मंशा को पूरा देश भलीभांति जानता है।"