भोपाल: प्रदेश के राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य में स्थानीय निवासियों की जरुरतों हेतु गत 31 जनवरी 2023 को डिनोटिफाई किये गये 207.049 हेक्टेयर क्षेत्र में मामले में नया पेंच आ गया है। केंद्र सरकार ने सवाल उठाया है कि डिनोटिफाई क्षेत्र के बदले समतुल्य भूमि क्यों नहीं उपलब्ध कराई। अब राज्य का वन विभाग नये सिरे से इसकी कवायद में जुट गया है।
वन विभाग ने राज्य वन्यप्राणी बोर्ड में लाये डिनोटिफाई संबंधी प्रस्ताव का अध्ययन किया है जिसमें समतुल्य भूमि देने का कोई प्रावधान नहीं था। राष्ट्रीय वन्य प्राणी बोर्ड में डिनोटिफाई का प्रस्ताव स्वीकृत हुआ था और उसमें भी समतुल्य भूमि देने का कोई प्रस्ताव नहीं था। जबकि सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि वन भूमि डिनोटिफाई करने पर समतुल्य भूमि देनी होगी। अब समतुल्य भूमि देने के लिये कार्यवाही शुरु की गई है।
उल्लेखनीय है कि चम्बल नेशनल अभयारण्य में रेत के लिये डिनोटिफाई किया गया क्षेत्र शुरु से ही विवादों में घिरा रहा। डिनोटिफिेशन के बाद आपत्ति आई कि ईको सेंसटिव जोन जोकि वन सीमा से दो किमी दूर तक रहता है और उसमें खनन प्रतिबंधित रहता है, को खत्म नहीं किया गया। केंद्रीय वन मंत्री भूपेन्द्र यादव ने भी इसके बारे में राज्य सरकार को पत्र लिखा था जिसके जवाब में वन विभाग ने बता दिया था कि डिनोटिफाई क्षेत्र में कोई इको सेंसेटिव जोन नहीं है। लेकिन अब फिर समतुल्य भूमि देने का पेंच आने से यहां रेत खनन का कार्य अटक गया है।