भोपाल: राज्य सरकार ने नर्सिंग घोटाला सामने आने के बाद जबलपुर में स्थित शासकीय आयुर्विज्ञान विवि के दायरे से नर्सिंग एवं पैरामेडिकल कोर्स चलाने वाली संस्थाओं को मान्यता देने का कार्य उसके दायरे से बाहर कर दिया है। अब ऐसी संस्थाओं के शिक्षण एवं प्रशिक्षण की मान्यता अन्य शासकीय एवं निजी विवि देंगे। इसके लिये विधानसभा के पिछले सत्र में तेरह साल पुराने मप्र आयुर्विज्ञान विवि अधिनियम 2011 में संशोधन का विधेयक पारित किया गया था जिसे अब राज्यपाल मंगु भाई पटेल ने स्वीकृति प्रदान कर दी है जिससे यह एक कानून के रुप में पूरे प्रदेश में प्रभावशील हो गया है।

संशोधित अधिनियम में कहा गया है कि आयुर्विज्ञान विवि की बढ़ती जिम्मेदारियों की दृष्टि से और राज्य के चारों तरफ फैले हुये नर्सिंग एवं पैरामेडिकल संस्थाओं की संख्या में सतत वृध्दि और छात्रों के बढ़ते हुये वार्षिक प्रवेश की दृष्टि से यह आवश्यक है कि अन्य मान्यता प्राप्त शासकीय एवं निजी विवि उपाधि एवं उपाधिपत्र स्तर पर नर्सिंग एवं पैरामेडिकल में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की जिम्मेदारी उठायें, जिससे कि आयुर्विज्ञान विवि नर्सिंग एवं पैरामेडिकल विषयों को छोडक़र चिकित्सा, दंत चिकित्सा, आयुर्वेदिक, यूनानी, होम्योपैथिक, योग, नेचुरोपैथी एवं सिध्द में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने पर ध्यान केन्द्रित कर सके। हलांकि संशोधित अधिनियम में स्पष्ट किया गया है कि आयुर्विज्ञान विवि के संबध्द बैचों पर यह लागू नहीं होगा।