मप्र में शिवराज मंत्रिमंडल का विस्तार व फेरबदल का मामला यदि  किसी तार्किक परिणिति तक नहीं पहुंचा तो इसे टाला भी जा सकता है, क्योंकि जातिगत समीकरण साधने की गरज से हो रहे इस विस्तार के लिये जैसे-जैसे चर्चा आगे बढ़ रही हैं, वैसे ही नये पेंच भी उभर रहे हैं। आज सुबह भी बैठक बेनतीजा रही। पार्टी के रणनीतिकार भी मान रहे हैं कि यदि यह पेंच नहीं सुलझते हैं तो मामला टालना पड़ सकता है।

दरअसल जातिगत और नाराजगी फैक्टर साधने के फेर में कई दावेदारों के नाम उभर रहे हैं। रीवा से राजेंद्र शुक्ला का 'चयन' इसी अंचल से कुछ और दावेदारों को नाराज कर सकता है, वहीं गौरीशंकर बिसेन के साथ भी यही स्थिति है, वे पहले से ही कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त हैं। उधर राहुल लोधी भी इकलौते दावेदार नहीं हैं, इसी तरह अब जालम सिंह पटेल का नाम भी सामने आया है तो यह भी संकेत उभर गये हैं कि यदि जालम को मंत्री बनाया गया तो संभव है कि उनके भाई व केंद्रीय राज्य मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल को दिल्ली से मुक्त करके मप्र में संगठन के काम में झोंका जाएगा।

इधर सूत्रों की मानें तो नॉन परफार्मर मंत्रियों को भी हटाने का दबाव बन रहा है, ताकि भाजपा के 'मूल कॉडर' के कुछ नेताओं को एडजस्ट किया जा सके। हालांकि यह दबाव छह महीने से है। इसमें सिंधिया खेमे के कुछ चेहरों को 'दूसरा काम' देने का दबाव है। दरअसल पार्टी के चुनाव रणनीतिककार केंद्रीय नेता भी भांप चुके हैं कि मप्र में कई मामलों में जमकर देरी हुई है तथा कई समीकरण बुरी तरह बिखर चुके हैं। सत्ता से दूर रखे गए नेताओं का तनाव व दबाव भी पार्टी को परेशान करने लगा है।

सूत्र बताते हैं कि मुख्यमंत्री ने इस मामले में वीडी शर्मा, नरेंद्र तोमर, कैलाश विजयवर्गीय से चर्चा की है। जिन विधायकों की कैबिनेट में आमद के लिये नाम चल रहे हैं वे भोपाल में ही डेरा डाले हैं। इस पूरी कवायद से हाइकमान को भी फार्मूला सुझाने के लिये अवगत कराया गया है।