भोपाल: मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की घोषणा के बाद वन भवन के "ई" ब्लॉक का भी अधिपत्य विभाग के पास ही रहने देने संबंधित प्रस्ताव मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दिया है. वन विभाग के शीर्ष अधिकारियों को उम्मीद है कि अगले कैबिनेट में इस प्रस्ताव पर मोहर लग सकती है.

राजधानी भोपाल के लिंक रोड नंबर 2 पर 180 करोड़  रुपये की लागत से बने वन भवन शिफ्टिंग का काम जोरों से चल रहा है. विभाग की कई शाखाएं पूरी तरह से शिफ्ट भी हो गई है. वन भवन का प्रमुख हिस्सा "ई" ब्लॉक को लेकर अधिकारियों एवं कर्मचारियों में छाई धुंध भी अब छंटने लगी है. 

सीएम शिवराज सिंह चौहान ने 8 अगस्त को अपने लोकार्पण भाषण में घोषणा कर दी कि वन भवन जंगल महकमे का ही रहेगा. मुख्यमंत्री चौहान  ने यह घोषणा वन मंत्री विजय शाह के आग्रह पर किया. मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद ही अपर मुख्य सचिव जेएन कंसोटिया और वन बल प्रमुख आरके गुप्ता ने "ई" ब्लॉक का आधिपत्य वन विभाग को ही सुपर जाने से संबंधित प्रस्ताव कैबिनेट की मंजूरी के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय को भेज दिया है.

कैबिनेट मंजूरी के बाद "ई" ब्लॉक वन विभाग अपने अधिपत्य में लेने के लिए राजस्व वापसी की प्रक्रिया शुरू होगी. वन विभाग  करीब ₹58 करोड़ रूपये राजस्व वापसी के लिए तैयार है. इस संदर्भ में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन भवन  के नोडल अफसर सुनील अग्रवाल ने अपने सेवानिवृत्ति के पहले ही 58 करोड़ रूपया देने संबंधित प्रक्रिया का ड्राफ्ट भी तैयार कर लिया है.

सीएम की घोषणा के बाद रजिस्ट्री प्रक्रिया रुकी

पूर्व में कैबिनेट के फैसले के बाद  वन भवन के "ई" ब्लॉक के टॉप फ्लोर मप्र इलेक्ट्रॉनिक निगम, सेकंड फ्लोर माइनिंग कारपोरेशन और फर्स्ट फ्लोर लेबर डिपार्टमेंट के विभिन्न शाखाओं को आवंटित कर दी गई थी. इन विभागों के शीर्षस्थ अधिकारी फ्लोर की रजिस्ट्री करने के लिए वन विभाग पर लगातार दबाव बना रहे थे. मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद से ही इलेक्ट्रॉनिक कॉरपोरेशन, माइनिंग कारपोरेशन और लेबर डिपार्टमेंट ने रजिस्ट्री के लिए दवा बनाना बंद कर दिया है. इसकी मुख्य वजह मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की घोषणा है. इस घोषणा के बाद ही सीनियर अधिकारी और कर्मचारियों के चेहरों पर विजय की मुस्कान स्पष्ट दिखाई देने लगी है.