मुआवजा 5 करोड़ 16 लाख 35 हजार 491 रुपये के स्थान पर 21 करोड़ 86 लाख 72 हजार 528 रुपये होने पर राज्य सरकार ने जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत्त कार्यपालन यंत्री अशोक कुमार सक्सेना के विरुध्द विभागीय जांच करने का निर्णय लिया है।
दरअसल उक्त कार्यपालन यंत्री जल संसाधन संभाग भोपाल में 11 मार्च 2019 से 30 सितम्बर 2021 तक पदस्थ थे। अजनाल पिकअप वियर के भू-अर्जन प्रकरण में पर्वत सिंह एवं अन्य ने भोपाल जिला न्यायालय में केस दायर किया था।
न्यायालय में मुआवजा राशि चक्रवृध्दि ब्याज दर के साथ 21 करोड़ 86 लाख 72 हजार 528 रुपये आई जिस पर न्यायालय ने उक्त कार्यपालन यंत्री से इस राशि के बारे में आपत्ति या अनापत्ति पूछी, परन्तु कार्यपालन यंत्री ने कोई आपत्ति नहीं की, जिस पर इसी राशि का निर्णय अदालत द्वारा पारित हो गया।
जबकि साधारण ब्याज दर से मुआवजा राशि 5 करोड़ 16 लाख 35 हजार 491 रुपये होती है। इस प्रकार, राज्य सरकार पर 16 करोड़ 70 लाख 37 हजार 37 रुपये का अनावश्यक भार पड़ गया। राशि का भुगतान न करने पर अदालत द्वारा कुर्की वारण्ट भी जारी किया गया जिस पर जल संसाधन विभाग के प्रमुख अभियंता कार्यालय से फर्नीचर, कम्प्यूटर, एलईडी आदि कुर्क की गई। इससे शासकीय कार्य में अत्यधिक व्यवधान हुआ और शासन की छबि भी धूमिल हुई।