2024 के सत्तापक्ष और विपक्ष की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी ने भी कमर कस ली है। अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव के लिए सभी राजनीतिक पार्टियां चुनाव की बिसात बिछाने में जुटी हैं। BSP प्रमुख मायावती ने भी आगामी लोकसभा चुनाव के साथ राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए भी अपनी रणनीति साफ कर दी है।

उनका कहना है, कि लोकसभा चुनाव का समय अब बेहद नज़दीक है। सत्ताधारी गठबंधन और विपक्षी गठबंधन की बैठकों का दौर चल रहा है, हालांकि इन मामलों में हमारी पार्टी भी पीछे नहीं है। एक तरफ सत्ता पक्ष NDA अपनी पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने की दलीलें दे रही है तो दूसरी तरफ विपक्षी गठबंधन सत्ताधारी को मात देने के लिए कार्य कर रही है और इसमें BSP भी पीछे नहीं है।

कांग्रेस पार्टी अपने जैसी जातिवादी और पूंजीवादी सोच रखने वाली पार्टी के साथ गठबंधन करके फिर से सत्ता में आने की सोच रख रही है साथ ही NDA फिर से सत्ता में आने का दावा ठोक रही है लेकिन इनकी कार्यशैली यही बताती है कि इनकी नीति और सोच लगभग एक जैसी ही रही है। यही कारण है कि BSP ने इनसे दूरी बनाई है।

उन्होंने आगे कहा कि, हम अकेले चुनाव लड़ेंगे। हम राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, तेलंगाना में अपने दम पर चुनाव लड़ेंगे और हरियाणा, पंजाब और अन्य राज्यों में हम राज्य के क्षेत्रीय दलों के साथ चुनाव लड़ सकते हैं। मायावती के इस एलान के बाद मध्यप्रदेश में कांग्रेस के लिए मुश्किलें हो सकती हैं। अब तक के चुनावों में BSP को कांग्रेस के वोट पर चोट करते ही देखा गया है। बीते विधानसभा चुनाव में तो BSP और कांग्रेस के गठबंधन की तक अटकलें थी लेकिन ऐसा हो नहीं पाया था।

भाजपा, कांग्रेस और सपा ने गठबंधन सहयोगियों की तलाश और बैठकें भी शुरू कर दीं। लेकिन इन सबके बीच बसपा ने अभी तक अपना पत्ता नहीं खोला था। बसपा प्रमुख मायावती राजनीतिक दलों की हर गतिविधि पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। वह बहुत मजबूती से समीकरण बनाने में लगी हुई हैं। राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि यूपी चुनाव में करारी हार के बाद मायावती अपनी पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं।

बसपा सुप्रीमो मायावती लोकसभा चुनाव से पहले यूपी में पार्टी को मजबूती मिलने वाले दूसरे राज्यों में ग्राफ को थोड़ा ऊंचा करने की कोशिश कर रही हैं। बसपा सुप्रीमो लगातार दूसरे राज्यों के पदाधिकारियों के साथ बैठकें कर रही हैं। बसपा पार्टी प्रमुख मायावती लोकसभा चुनाव को लेकर बेहद गंभीर हैं। वह लगातार संगठनात्मक बैठकों के जरिए कार्यकर्ताओं में जोश भर रही हैं। इतना ही नहीं फीडबैक के आधार पर वह ग्राउँड लेवल पर समीकरण दुरुस्त करने की योजना पर काम कर रही हैं