भोपाल: राज्य के विधि विभाग ने हाईकोर्ट एवं सुप्रीम कोर्ट में सरकारी विभागों एवं कार्यालयों द्वारा लगाई जाने वाली अपील/विशेष अनुमति याचिका यानि एसएलपी या रिट लगाने की नई प्रक्रिया तय कर दी है। ऐसा विलम्ब से इन्हें लगाने के रवैये पर लगाम लगाने के लिये किया गया है।

विधि विभाग के प्रमुख सचिव बीके द्विवेदी द्वारा जारी नई प्रक्रिया के अनुसार, उच्च एवं उच्चतम न्यायालय में प्रकरण के संबंध में प्रशासकीय विभाग द्वारा नियुक्त प्रभारी अधिकारी प्रकरण में विभाग की ओर से जागरूकता सहित भागीदारी करें तथा निर्णय की जानकारी तत्काल प्राप्त कर निर्णय प्रशासकीय विभाग के प्रतिकूल होने पर तत्काल महाधिवक्ता से अपील अथवा एसएलपी के लिये राय प्राप्त कर प्रशासकीय विभाग को तत्काल सूचित करें।

महाधिवक्ता के अभिमत में अपील अथवा एसएलपी की राय होने पर प्रशासकीय विभाग इस तथ्य को ध्यान में रखे कि, निर्णय की प्रति प्राप्त होने के 90 दिवस के भीतर अपील अथवा एसएलपी प्रस्तुत की जानी है, जिसमें संबंधित अधिवक्ता को अपील अथवा एसएलपी का प्रारूप भी तैयार करना सम्मिलित होगा, तब प्रशासकीय विभाग की ओर से विधि विभाग को उक्त 90 दिवस की अवधि को संज्ञानित रखते हुए विधि विभाग से परामर्श हेतु अत्यंत शीघ्रतापूर्वक कार्यवाही करना अपेक्षित होगा।

नई प्रक्रिया में कहा गया है कि अपील की अनुमति हेतु प्रशासकीय विभाग द्वारा प्रस्ताव सभी आवश्यक दस्तावेजों सहित प्रस्तुत किया जायेगा, जिसमें विवादित आदेश की प्रति, प्रशासकीय अनुमोदन, रिट पिटिशन एवं जवाबदावा की प्रति प्रकरण की संक्षेपिका, शासकीय अधिवक्ता/महाधिवक्ता का अभिमत, अपील हेतु आधारों की जानकारी, प्रशासकीय विभाग द्वारा प्रभारी अधिकारी की नियुक्ति का आदेश तथा विलंब यदि कोई है तो उसके कारणों का उल्लेख आदि दस्तावेज आवश्यक हैं।

विधि विभाग में उपरोक्त कार्यवाही विहित अवधि में प्राप्त होने पर परिसीमा विधान की उक्त विधिक स्थिति को दृष्टिगत रखते हुए विभागीय नियमावली के अनुसार अपील अथवा एसएलपी प्रस्तुत करने की अनुमति के संबंध में निष्कर्ष दिया जावेगा।

नई प्रक्रिया में कहा गया है कि विभिन्न प्रकरणों में प्रभारी अधिकारियों एवं नियुक्त अधिवक्ताओं के लिए अपने कार्य हेतु एक चेक-लिस्ट तैयार कर उपलब्ध कराई जाए। • प्रभारी अधिकारियों को उनके कार्य एवं दायित्वों के संबंध में विभागवार प्रशिक्षण दिया जाये, प्रशिक्षण हेतु मेन्युअल विधि विभाग द्वारा तैयार कर उपलब्ध कराया जावे।

महाधिवक्ता एवं अतिरिक्त महाधिवक्ता कार्यालयों के अधिवक्ताओं एव स्टाफ की जिम्मेदारी तय की जावे। महाधिवक्ता कार्यालय में प्रचलित केस मेनेजमेंट सिस्टम के अंतर्गत जिला कलेक्टरों तथा विभाग के अपर मुख्य सचिव/प्रमुख सचिव/सचिव को उनके विभाग के आगामी सप्ताह में लगने वाले एवं गत सप्ताह में निराकृत प्रकरणों की जानकारी के संबंध में एक्सेस प्रदान किया जावे।