धार जिले में विवादास्पद भोजशाला का भारतीय पुरातत्व सर्वे (ASI) के जरिए किया जा रहा. सर्वे शनिवार को दूसरे दिन भी जारी रहा। शनिवार सुबह करीब आठ बजे एएसआई की एक टीम विवादित परिसर में पहुंची। एएसआई टीम के साथ पुलिस और स्थानीय प्रशासन के सीनियर अधिकारी भी मौजूद रहे।
इस दौरान एएसआई के वकील हिमांशु जोशी के अलावा हिंदू और मुस्लिम पक्ष के प्रतिनिधि भी भोजशाला में उपस्थित रहे। भोजशाला में पर्यटकों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई। परिसर के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस के जवान तैनात हैं। साथ ही 60 कैमरों की मदद से भी क्षेत्र की निगरानी की जा रही है।
गौरतलब है कि मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद सबसे पहले यह कवायद शुक्रवार को शुरू हुई। कोर्ट में पक्षकारों में से एक, कमाल मौला मस्जिद कल्याण सोसायटी के अध्यक्ष अब्दुल समद ने कहा कि हम हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं. अगर संविधान के दायरे में और हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए सर्वेक्षण कराया जाए, तो इसमें कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन इसमें नए मुद्दे पैदा हो रहे हैं।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने 11 मार्च को एएसआई को धार जिले के विवादास्पद भोजशाला परिसर का छह सप्ताह के भीतर वैज्ञानिक सर्वे करने का निर्देश दिया है। हिंदू पक्ष एएसआई के संरक्षित ऐतिहासिक भोजशाला परिसर को वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला की मस्जिद बताता है।