कुरई थाने और बादलपार चौकी के पूरे स्टाफ को भी हटाने के लिए कहा गया है। सिवनी जिले के कुरई तालुका के सिमरिया गांव में बीफ तस्करी के शक में तीन आदिवासियों को लाठियों से पीटा गया। दो की मौत हो गई और कम से कम एक घायल हो गया। ग्रामीणों ने बजरंग दल से जुड़े लोगों पर हत्या का आरोप लगाया था..!
मध्यप्रदेश के सिवनी ज़िले में दो आदिवासियों की हत्या के मामले में सरकार की नींद 12 दिन बाद खुली है।
— Kamal Nath (@OfficeOfKNath) May 14, 2022
वह भी कांग्रेस व आदिवासी वर्ग के दबाव में यह निर्णय लिया गया है।
इधर मध्य प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष कमलनाथ ने कहा कि मध्यप्रदेश के सिवनी ज़िले में दो आदिवासियों की हत्या के मामले में सरकार की नींद 12 दिन बाद खुली है।वह भी कांग्रेस व आदिवासी वर्ग के दबाव में यह निर्णय लिया गया है।पहले सरकार पूरे मामले में लीपापोती में लगी रही , आरोपियों को बचाने वाले बयान ज़िम्मेदार देते रहे , प्रशासन को क्लीन चिट देते रहे और अब सरकार आज एसआईटी जाँच की घोषणा कर रही है? अभी भी जो घोषणा हुई है वो अधूरी है , कई ज़िम्मेदारों को बचा लिया गया है,दोषी अधिकारियों का निलंबन हो , एसआईटी जाँच की बजाय उच्च स्तरीय जाँच की घोषणा हो , आरोपियों का भाजपा से जुड़े संगठनों से कनेक्शन सामने आये।
नेमावर कांड में भी इसी प्रकार सरकार सीबीआई जाँच से बचती रही और छह माह बाद सरकार ने सीबीआई जाँच की माँग मानी।पता नहीं क्यों शिवराज सरकार आदिवासी भाइयों की इतनी विरोधी है , वह उनको न्याय दिलाना ही नहीं चाहती है।