मोहल्लों-बस्तियों के कुछ घरों में क्या होता है यह बाकी के लोग नहीं जानते, यह तब पता लगता है जब किसी जान-माल का जबर्दस्त नुकसान होता है या किसी अन्य वजह सेइलाका बदनामी का कारण बन जाता है। हाल में भागलपुर में हुआ हादसा न केवल दुखद, बल्कि इसी तरह से शर्मनाक भी है। भागलपुर के तातारपुर थाना क्षेत्र के काजवलीचक मोहल्ले में चार दिन पहले एक घर में जोरदार धमाका हुआ, जिससे कुल तीन घर जमींदोज हो गए। दस से ज्यादा लोगों की मौत हो गई, जिनमें एक महिला और एक बच्चा भी शामिल है।

बताया जाता है कि एक घर में पटाखे बनाने का काम चल रहा था और एक परिवार की आपराधिक गलती की वजह से अनेक परिवारों पर आपदा टूट पड़ी। पटाखे बनाने का काम कितना खतरनाक है, शायद इसका अहसास निर्माण में जुटे लोगों को नहीं था और इसी वजह से तबाही का मंजर सामने आया है। पुलिस को हादसे की तह में जाकर देखना चाहिए कि आखिर किस तरह के पटाखे का निर्माण हो रहा था? किस तरह के रसायन का उपयोग हो रहा था? ऐसे विस्फोटक आखिर एक बस्ती में पहुंचे कैसे?

कार्रवाई के नाम पर जिला प्रशासन ने इस मामले में एक इंस्पेक्टर को सस्पेंड कर दिया है, लेकिन क्या इस हादसे के लिए केवल एक ही व्यक्ति जिम्मेदार है? बिना मंजूरी अगर निर्माण हो रहा था, फिर तो स्थानीय स्तर पर तत्काल कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए। केवल पटाखे बनाने वालों को ही नहीं, बल्कि इसका अवैध कारोबार करने वालों को भी दबोचना चाहिए। वहां जिस तरह के पटाखे बनाए जा रहे थे, क्या उनके ग्राहक बिहार के बाहर के हैं? विस्तार में देखना चाहिए कि भागलपुर आधी रात को क्यों थर्रा उठा?

अनेक घायलों का इलाज चल रहा है, इनसे भी पूछताछ होनी चाहिए। ऐसा हो नहीं सकता कि यहां विस्फोटक सामग्री के बारे में किसी को न पता हो। क्या हमने अपने आसपास की आपराधिक गतिविधियों की ओर से आंखें मूंदना सीख लिया है! वैसे यह बात सुनने लिखने में खराब लगती है लेकिन समाज ऐसी ही दिशा में आगे बढ़ रहा है जहां आसपास की बातों पर गौर नहीं किया जाता, अक्सर किसी गतिविधि को अनदेखा किया जाता है।

खबर तो यह भी सामने आई कि पीड़ित परिवारों में से एक पटाखा बनाने का काम करता था और इनके घर पहले भी विस्फोट की घटना हो चुकी है। बहरहाल मामला पटाखे या बंदूक निर्माण का हो या अवैध शराब निर्माण का या फिर महिलाओं के गलत कारोबार का। इनमें फौरी कार्रवाई करके अपराधियों को छो?ने की कुप्रवृत्ति का अंत हो जाये यही बेहतर है। गौरतलब है कि कई बार किसी पॉश कालोनी में यह किसी फ्लैट या बस्ती के घर में महिलाओं से जिस्मफरोशी कराये जाने के मामले भी सामने आये हैं। वहीं कुछ वर्ष पहले भोपाल में भी हथियार बनाने की एक फेक्ट्री पकड़ी गई थी, यानि तब भी आसपास के लोग काफी समय तक बेखबर ही थे। यह घटनायें बताती हैं कि समाज में किसी भी तरह के अपराध को छिपाया जाना खुद को खतरे में डालने जैसा है। हर बार पुलिस या प्रशासन को ही जिम्मेदार मानने के बजाए हमे *खुद को भी जवाबदेह मानना होगा।