भोपाल: सरकार द्वारा तबादले करने के लिए आज अंतिम दिन है। जंगल महकमे में सीएफ, डीएफओ, एसडीओ और रेंजरों के तबादले से संबंधित एक भी सूची जारी नहीं हो सकी है। सत्ता में सीधे रसूख वाले नेताओं, मंत्रियों और धर्मगुरुओं की सिफारिशों की वजह से प्राइम पोस्टिंग के लिए ट्रांसफर लिस्ट में नाम एड और डिलीट हो रहें हैं। इसमें एक रोचक नाम अफीम इलाके में पदस्थ आईएफएस का है, जिन्होंने एक वाहन छोड़ने के एवज में सिंगरौली जैसी अति सम्पदा वाली टेरिटोरियल की डिमांड कर डाली।
जंगल महकमे में भोपाल, सिवनी, शहडोल, रीवा और ग्वालियर सर्किल में सीएफ, संजय नेशनल पार्क और पन्ना टाइगर रिजर्व में फील्ड डायरेक्टर के रिक्त पदों पर अनुभवी और मैनेजमेंट में माहिर अफसरों के नामों पर मंत्रालय से लेकर मुख्यालय के शीर्षस्थ अफसरों के बीच मंथन चल रहा है। इसके अलावा तीन साल से एक ही वन मंडल में जमे डीएफओ को हटाकर उनकी नवीन पोस्टिंग सहित करीब डेढ़ दर्जन से अधिक डीएफओ को इधर-उधर किया जाना है।
तबादले के मौसम में नर्मदा पट्टी के लूपलाइन वन मंडल में पदस्थ एक आईएफएस के सिफारिश की चर्चा सुर्खियों में हैं। धर्मगुरु से सिफारिशी पत्र लिखवाने अफसर देवास अथवा खंडवा वन मंडल में पदस्थ होना चाहते हैं। इसी तरह से अफीम पट्टी में पदस्थ डीएफओ ने एक गाड़ी छोड़ने के एवज में सिंगरौली वन मंडल की डिमांड पेश कर दी। मुख्यमंत्री सचिवालय में पदस्थ एक प्रभावशाली अधिकारी के कहने पर 2012 बैच के सीएफ ने डीएफओ पर दबाव डालकर मामूली फाइन गाड़ी को छुड़वा दिया। यह बाद अलग है कि मालवा के सीसीएफ ने प्रमुख सचिव संदीप यादव के संज्ञान में पूरा प्रकरण ला दिया।
मनचाही पोस्टिंग के लिए मंत्रालय के टॉप फ्लोर की परिक्रमा
जंगल महकमे में वर्किंग प्लान को गीता की तरह माना जाता है और वनों की अंतरात्मा भी कहा जाता है। आईएफएस अधिकारियों के लिए वर्किंग प्लान में पोस्टिंग पहले कभी अनिवार्य थी मगर इस अनिवार्यता को अधिकारियों ने समाप्त करा लिया। अब युवा पीढ़ी के आईएफएस अधिकारी वर्किगं प्लान की पोस्टिंग में या जाना नहीं चाहते या फिर बीच में ही छोड़ने की कोशिश करने लगते हैं। वर्किंग प्लान जंगल के आगे के दस साल की प्लानिंग होती है जिसमें सर्वे के आधार पर घने जंगलों को कितना औऱ कैसे काटने की अनुमति दी जाए और जहां पेड़ कम हो गए हों वहां किन स्थानों पर पौधों को लगाया जाए।
वर्किंग प्लान को तीन साल में पूरा करना होता है मगर 2012 बैच के भोपाल के क्षितिज कुमार, ग्वालियर के लवित भारती, शहडोल के महेंद्र प्रताप सिंह, रीवा के अनुराग कुमार व पन्ना टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर बृजेंद्र श्रीवास्तव को वर्किंग प्लान के साथ अन्य प्रभार भी दे दिए गए जिससे वर्किंग प्लान के साथ न्याय नहीं हो पा रहा है। ये युवा आईएफएस अधिकारी कोशिश कर रहें हैं वर्किंग प्लान से मुक्त होकर सर्किल में पोस्टिंग मिल जाय। इनका साथ मंत्रालय के टॉप फ्लोर के एक प्रमोटी आईएएस अधिकारी कर रहे हैं। इस काम में इन अधिकारियों के लीडर क्षितिज कुमार बने हैं, जिनकी मंत्रालय के टॉप फ्लोर पर मजबूत पकड़ बताई जा रही है।
2022 बैच के आईएफएस को चाहिए पहली पोस्टिंग कमाऊं वनमंडल
पीपी मोड में पोस्टिंग परम्परा के चलते ही 2022 के रसूखदार आईएफएस अफसर अपनी पहली ही पोस्टिंग में ही बड़े और प्राइम वन मंडल लेने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दी है। जबकि नए आईएफएस को डीएफओ सामाजिक वानिकी अथवा उत्पादन शाखा में पदस्थ करने का प्रावधान है। विभाग ने इन्हीं पदों पर 2022 बैच के आईएफएस को पदस्थ करने का प्रस्ताव शासन को भेजा है। इन प्रस्तावों के विपरीत 2022 बैच के आईएफएस पीपी मोड के तहत मुख्यालय के प्रस्ताव को बदलवाने में अपनी ताकत झोंक दी है। इसी वजह से करीब डेढ़ महीने से उनकी पोस्टिंग नहीं हो पा रही है।