भोपाल. मप्र अजब है, सबसे गजब है. प्रदेश के जंगल महकमे में ऐसे उदाहरण ढूंढने से भी नहीं मिलेंगे. सामग्री प्राप्त किए बिना ही प्रदायकर्ता फर्म को करीब ₹50 लाख का भुगतान कर दिया गया. जब मामला प्रकाश में आया तब तक डीएफओ सेवानिवृत्त हो चुके थे. न सीसीएफ ने इस मामले को गंभीरता से लिया और न ही वर्तमान एपीसीसीए एवं पदेन सीएफ मनोज अग्रवाल गंभीरता से ले रहे हैं. अग्रवाल का तर्क भी बड़ा दिलचस्प है. वह कहते हैं डीएफओ भुगतान करके रिटायर हो गया. अगर अब कार्रवाई होती है तो बेचारे एसडीओ-रेंजर पर होगी.
मामला उज्जैन सर्किल के शाजापुर वन मंडल का है. यह वन मंडल टीपी कांड को लेकर चर्चा में था और अब सामग्री प्राप्त किए बिना ही 50 लाख के भुगतान को लेकर चर्चा में हैं. मामला जनवरी का है. सुर्खियों में अब आया है. शाजापुर वन मंडल के डीएफओ रहे जामसिंग भार्गव 31 जनवरी को रिटायर हो गए थे. रिटायरमेंट के 15 दिन पहले ही गड़बडी करने का ब्लू प्रिंट तैयार कर लिया था.
तत्कालीन डीएफओ रामसिंह भार्गव ने टेंडर किए बिना ही टुकड़े-टुकड़े में ₹50 लाख के चैनलिंक खरीदी के आर्डर कर दिए थे. 31 जनवरी को रिटायर होना था और 30 जनवरी को सामग्री प्राप्त किए बिना ही प्रदाय कर्ता फॉर्म को ₹50 लाख का भुगतान कर दिया.
डीएफओ ने यह भुगतान एसडीओ अंकित जामोड और रेंजर सिब कुमार मैथानी के कागजी बाउचर के आधार पर कर दिया. यानी डीएफओ के दबाव में आकर एसडीओ और रेंजर ने सामग्री की सत्यापन किए बिना ही कागजों पर भुगतान के लिए बाउचर डिपो के समक्ष प्रस्तुत कर दिया था. यानी कमीशन बाजी के खेल में डीएफओ के साथ-साथ एसडीओ और रेंजर की भी भूमिका अहम रहीं.
ऐसे हुआ मामला उजागर :
डीएफओ जामसिंग भार्गव के रिटायरमेंट के बाद से 18 अप्रैल तक शाजापुर डीएफओ के पद पर किसी की भी पदस्थापना नहीं हुई. इस बीच शाजापुर डीएफओ का प्रभार उज्जैन डीएफओ को दिया गया. उज्जैन डीएफओ ने बतौर प्रभारी डीएफओ शाजापुर मैदानी दौरा और कार्यालय में सरकारी दस्तावेज के पन्ने पलटे तब यह मामला उजागर हुआ.
मामला संज्ञान में आते ही तत्काल दो पत्र तत्कालीन सीसीएफ उज्जैन मोलिका मोहंता को लिखे. चूंकि मोहंता काफी पहले ही उज्जैन सर्किल से इंदौर पदस्थ करने के लिए विभाग के मुखिया को पत्र लिख चुकी थी. इसलिए उन्होंने प्रभारी डीएफओ के पत्र को गंभीरता से नहीं लिया. मामला गंभीर था, इसलिए प्रभारी डीएफओ ने एसडीओ और रेंजर पर कार्रवाई करने का दबाव बनाया तब कहीं जाकर गुणवत्ता से विपरीत माल प्रदान किया गया.
यह तो वित्तीय अनियमितता है-
अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक वित्त एचयू खान का कहना है कि सामग्री प्राप्त किए बिना इतनी बड़ी राशि का भुगतान करना, वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है. रिटायरमेंट के बाद भी कार्रवाई तो बनती है.
एनओसी के लिए मुख्यालय के चक्कर-
रिटायरमेंट के 1 दिन पहले ही सामग्री प्राप्त किए बिना ₹50 लाख का भुगतान करने वाले डीएफओ जामसिंग भार्गव अब पेंशन के कागज तैयार कराने के लिए मुख्यालय के चक्कर लगा रहे हैं. आला अधिकारियों की गणेश परिक्रमा कर रहे हैं ताकि उनके द्वारा किए गए कृत्य का पता चलने से पहले ही एनओसी मिल जाए. पेंशन में किसी प्रकार की आपत्ति न लग पाए.
आपत्ति के बाद अलीराजपुर में कर दिया करोड़ों का भुगतान-
अलीराजपुर वन मंडल में आपत्तिजनक बाउचरों का निराकरण किए बिना ही दो से तीन करोड़ रुपए का भुगतान करने का मामला प्रकाश में आया है. दरअसल अलीराजपुर डीएफओ कुमारी संध्या का तबादला हो गया था. संध्या की जगह पर मयंक सिंह गुर्जर डीएफओ की पदस्थापना की गई थी. गुर्जर ने नए पद की जिम्मेदारी लंबे समय तक स्थगित रखा. इस बीच धार में पदस्थ डीएफओ गरीबदास बरबड़े को अलीराजपुर वन मंडल का प्रभार दिया गया.
प्रभार संभालते ही डीएफओ बरबड़े ने विवादास्पद लंबित बाउचरों के पेमेंट कर दिए. जबकि पूर्व डीएफओ संध्या ने दो से तीन करोड़ रुपए के बाउचरों का भुगतान इसलिए रोक दिया था, क्योंकि उसमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ी किए जाने की आशंका थी.
मौजूदा डीएफओ अलीराजपुर मयंक सिंह गुर्जर कहते हैं कि किसी पूर्व डीएफओ की आपत्ति लगाए जाने के बाद भुगतान नहीं किया जा सकता है. उसका भुगतान आपत्तियों के निराकरण के बाद ही हो सकता है. गुर्जर यह भी कहते हैं कि डीएफओ ने भुगतान एसडीओ के सत्यापन के बाद ही किया होगा.