भोपाल: प्रदेश के तालाब एवं नहरों के छिन्न-भिन्न होने से इनकी मरम्मत के लिये केंद्र से सहायता का प्रस्ताव तैयार होगा। राज्य के जल संसाधन विभाग के भोपाल स्थित कार्यपालन यंत्री बजट आरके खुराना ने वैनगंगा कछार सिवनी के मुख्य अभियंता से कहा है कि इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही कर मुख्यालय को अवगत कराया जाये।

दरअसल बालाघाट के लोकसभा सदस्य डॉ. ढाल सिंह बिसेन ने गत दिनों लोकसभा में शून्यकाल की सूचना दी थी कि मप्र में कृषि और पेयजल के तालाबों का संरक्षण अति आवश्यक है। स्वतंत्रता प्राप्त किए हुए 75 साल हो गए हैं, जो तालाब निर्मित किए गए थे, उनकी जो नहर प्रणालियां हैं, वे लगभग छिन्न-भिन्न हो गई हैं।

इनका ठीक से रखरखाव न होने के कृषकों को पानी नहीं मिलता है। यद्यपि पुराने तालाबों की जितनी क्षमता थी, आज की तारीख में दोगुनी क्षमता से सिंचाई कर रहे हैं। उनके लोकसभा क्षेत्र में टिकाड़ी गांव में सर्राठी तालाब है। यह 105 साल पुराना है। इसकी नहर प्रणाली लगभग समाप्त हो गई है।

केंद्र सरकार से मांग है कि सिंचाई के लिए नहर प्रणाली को ठीक करने के लिए राशि दी जाए। इसके गेट, कुलापे बर्बाद हो गए हैं। ढूटी एक बड़ा पुराना जलाशय वेनगंगा नदी पर है। इस पर इतनी सिल्ट हो गई है कि एक फुट भी पानी नहीं भरता है।

इसकी रिसिल्टिंग की जाए। इसके अलावा हमारे क्षेत्र में 70 से 100 साल पुराने तालाब हैं, इनकी नहर प्रणालियों का सीमेंटीकरण किया जाए ताकि सिंचाई की क्षमता, जो दोगुनी विकसित की गई है, इसे और ज्यादा विकसित किया जा सके।

इसका पानी बर्बाद नहीं होना चाहिए और सिंचाई के लिए पूरा पानी मिलना चाहिए। हम बहुत तालाबों में पेयजल के लिए भी पानी देते हैं। इसका पानी बर्बाद न हो, इसलिए डैम सेफ्टी के अंतर्गत इन तालाबों का पुन: संरक्षण करने के लिए केंद्र सरकार अधिकतम राज्यों की मदद करे।

डॉ. बिसेन के उक्त उल्लेख पर कार्यवाही करने के लिये केंद्र सरकार ने मप्र के जल संसाधन विभाग को निर्देश जारी किये हैं जिस पर अब केंद्रीय सहायता के लिये प्रस्ताव तैयार किये जायेंगे।