बहुचर्चित हनीट्रैप मामला में एक बार फिर रोज नए खुलासे हो रहे हैं। मामले के एक आरोपी अभिषेक ठाकुर ने सरकारी गवाह बनाने पर इससे जुड़ी कई अहम जानकारी देने की बात कही है. उसने इसे हनीट्रैप नहीं ह्यूमन ट्रैफिकिंग कहा है। जेल से बाहर आए आरोपी अभिषेक ठाकुर ने कहा है कि श्वेता से मिलने आने वाले बड़े अधिकारियों और सफेदपोश लोगों की पूरी लिस्ट कोर्ट को दे सकता हूं। इसलिए सरकारी गवाह बनना जरूरी है।

हनीट्रैप कांड की कहानी अभिषेक की जुबानी ...
17 सितंबर 2019 को हनीट्रैप मामले में FIR दर्ज होने के बाद पुलिस ने मुझे भोपाल से गिरफ्तार किया था। श्वेता जैन से मेरी पहचान वर्ष 2016 में हुई थी। श्वेता ने NGO का काम करवाने के लिए मुझे 15 से 20 प्रतिशत का कमीशन देने की बात कही थी। बाद में थर्मल प्रोडक्ट फैक्ट्री का मैनेजमेंट देखने के लिए जॉब ऑफर की। मुझे आरती दयाल से मिलवाया, मैं उसके पहले तक आरती को जानता नहीं था। पुलिस ने मुझे जब गिरफ्तार कर जेल भेजा तब मालूम हुआ कि इंदौर के इंजीनियर हरभजन ने ब्लैकमेलिंग का कोई मामला दर्ज करवाया है। श्वेता और आरती पहले से पुलिस की गिरफ्त में थीं। मुझे उनका पूरा सच मालूम है। उन्हें डर था कि मैं उनका राज खोल सकता हूं और कई लोगों के नाम सामने ला सकता हूं। इसलिए उन दोनों ने मेरा नाम लेकर मुझे गिरफ्तार करवा दिया। श्वेता के पास कई सफेदपोश लोग आते थे. मुझे कोर्ट सरकारी गवाह बना दे तो मैं कोर्ट के सामने यहां आनेवाले लोगों की पूरी लिस्ट सौंप दूंगा। मैंने कई बड़े नेता, अधिकारियों और सफेदपोश लोगों को श्वेता के पास आते देखा है। मैं सभी लोगों के नाम बता सकता हूं। मुझे जान का खतरा है इसलिए मैं अभी किसी का नाम नहीं ले सकता। मामले में कई वीआईपी का राज खुल जाएगा.