भोपाल: जंगल महकमे में रेत की खदान को नियम विरुद्ध एनओसी देने के मामले में प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल ने जिस एसडीओ को प्रथम दृष्टया दोषी माना, उसे नवागत सीसीएफ शहडोल लखन लाल उइके ने क्लीन चिट दे दिया. पीएस वर्णवाल ने दो वेतन वृद्धि रोकने के निर्देश दिए थे.

मामला शहडोल सर्किल के ब्यौहारी बोड्डीहा खदान से जुड़ा है. की कहानी में बड़ी दिलचस्प है. यह खदान सीधी वन मंडल के डेढ़ किलोमीटर दूर है. इसकी एनओसी ब्यौहारी एसडीओ वन विद्या भूषण मिश्रा ने जारी कर दिया. तब एसडीओ मिश्रा बतौर प्रशिक्षण पदस्थ थे.

तत्कालीन पूर्णकालिक प्रभारी एसडीओ जया पांडे ( वर्तमान में संजय टाइगर रिजर्व में पदस्थ हैं ) के मैटरनिटी लीव पर जाने के कारण तत्कालीन सीसीएफ शहडोल एके जोशी ने उन्हें ब्यौहारी का प्रभार दे दिया था, जोकि नियम विरुद्ध था. एसडीओ का प्रभार आते ही रेंजर की रिपोर्ट को आधार मानते हुए मिश्रा ने तहसील के बोड्डीहा खसरा क्रमांक 233/01 4.50 हेक्टेयर से खदान हेतु एनओसी प्रदान कर दी.
ऐसे आया प्रकाश में मामला-
तत्कालीन सीसीएफ एके जोशी के रिटायरमेंट के बाद पीके वर्मा को शहडोल सीसीएफ बनाया गया. वर्मा ने जब एनओसी की फाइल पलटी तो मामला प्रकाश में आया. दरअसल संजय टाइगर रिजर्व में तत्कालीन पदस्थ डिप्टी डायरेक्टर अशोक कुमार वर्तमान में वन मंत्रालय वल्लभ भवन में पदस्थ हैं, ने लिखित आपत्ति दर्ज कराते हुए सीसीएफ शहडोल को पत्र लिखा. इस पत्र के आधार पर ही जांच हुई और जांच में यह स्पष्ट पाया गया कि खदान की एनओसी नियम विरुद्ध दी गई. इस पर संज्ञान लेते हुए सीसीएफ वर्मा ने एसडीओ विद्या भूषण मिश्रा को आरोप पत्र जारी कर दिया.
जांच प्रतिवेदन और अरबपति के आधार पर ही प्रमुख सचिव अशोक वर्णवाल ने कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए प्रथम दृष्टया दोषी मानते हुए 2 वेतन वृद्धि रोकने के लिए लिखा. अपने निर्देश में वर्णवाल ने लिखा कि आपके (sdo मिश्रा) द्वारा ग्राम बोड्डीहा तहसील व्यवहारी के खसरा क्रमांक 233/01 खदान की एनओसी वन सीमा से ढाई सौ मीटर के अंदर एनओसी दी गई. सिया प्रपत्र में 10 किलोमीटर की परिधि में अभयारण्य दर्शाते हुए नरसी दी गई जिसकी आपके द्वारा गलत व्याख्या दी गई है. मध्यप्रदेश सिविल सेवा नियम 1966 के नियम 10 के अंतर्गत क्यों न दो वेतन वृद्धि आसंचयी प्रभाव से रोकी जाए.
नए सीसीएफ ने बदले आदेश-
शहडोल सीसीएफ पीके वर्मा के स्थानांतरण के बाद लखन लाल उइके ने उनका पदभार संभाला. पदभार संभालने के तीसरे दिन में ही डीएफओ गौरव चौधरी की टिप्पणी के बगैर ही एसडीओ व्यवहारी मिश्रा को क्लीन चिट दे दी है. इस मामले ने हुई कि ने बताया कि जब एनओसी दी गई थी तब मिश्रा प्रभार में नहीं थे. मैंने जांच प्रतिवेदन की गंभीरता से अध्ययन करने के बाद ही एनओसी दी है.
अब रात में पेट्रोलिंग नहीं करेंगे डीएफओ-
सीसीएफ शहडोल उईके पदभार संभालते ही एक और पुराने आदेश को पलट दिया. यह आदेश डीएफओ रात्रिकालीन पेट्रोलिंग को लेकर था. वन मंत्री के निर्देश पर ही मां में दो बार रात्रिकालीन गश्त करने के लिए डीएफओ को निर्देशित किया गया था. उईके ने डीएफओ को रात्रिकालीन पेट्रोलिंग से मुक्त करते हुए एसडीओ की ड्यूटी लगा दी है. यहां यह भी उल्लेखनीय है कि वन मंत्री विजय साहब बार-बार यह फरमान जारी करते आ रहे हैं कि डीएफओ और शिष्य को रात कालीन गश्त करना चाहिए और गांव वालों के बीच एक रात गुजारनी चाहिए.