भोपाल: राज्य में कोविड काल में बंद हुये निजी स्कूलों के बच्चों को शिक्षा का अधिकार कानून के तहत नये सत्र में प्रवेश मिलेगा। राज्य शिक्षा केंद्र ने सभी जिला कलेक्टरों से ऐसे बंद हुये स्कूलों की जानकार मांगी है तथा कहा है कि जो स्कूल अपने बंद होने की जानकारी न दे, उस पर 50 हजार रुपये प्रति विषर्थी पेनाल्टी वसूली जाये।
राज्य शिक्षा केंद्र नपे इस संबंध में सभी जिला कलेक्टरों को परिपत्र जारी कर कहा है कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत वंचित समूह एवं कमजोर वर्ग के छात्रों को गैर अनुदान मान्यता प्राप्त अशासकीय स्कूल में प्रवेश होने के उपरांत कोरोना काल में मान्यता प्राप्त अशासकीय विद्यालय बंद हो गये हैं।
जिसके कारण इन स्कूलों में शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत अध्ययनरत बच्चे शासन द्वारा प्रदत्त किये गये लाभ से वंचित हो रहे हैं। उक्त समस्या पर सम्यक विचारोपरांत राज्य शासन द्वारा छात्र हित में यह निर्णय लिया गया है कि जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा कोविड के कारण बंद हुये अशासकीय स्कूलों की जानकारी भेजी जायेगी (इसमें उन स्कूलों को सम्मिलित नहीं किया जायेगा, जिनकी मान्यता मापदण्डों की पूर्ति न होने के कारण जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा निरस्त कर दी गई है)।
तत्पश्चात इन स्कूलों में नि:शुल्क अध्ययनरत बच्चों को अनमैप किया जायेगा, ताकि सत्र 2020-21 एवं 2021-22 में कोविड के कारण बंद विद्यालयों में नि:शुल्क अध्ययनरत बच्चे सत्र 2022-23 के ऑनलाइन प्रवेश की प्रक्रिया में आयु अनुरूप नर्सरी के.जी-1, के.जी-2 एवं कक्षा-1 में नि:शुल्क प्रवेश प्रक्रिया में ऑनलाइन आवेदन करने हेतु पात्र हो सकें।
परिपत्र में कहा गया है कि अशासकीय स्कूलों द्वारा स्कूल बंद होने की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी को नहीं दी जाती है तो उनके स्कूलों में आरटीई अंतर्गत अध्ययनरत बच्चे लाभ से वंचित हो जायेंगे, इसलिए संबंधित स्कूलों को स्कूल बंद होने की जानकारी तत्काल जिला शिक्षा अधिकारी को देना चाहिये, अगर उनके द्वारा शीघ्र जानकारी नहीं दी जाती है तो उन स्कूलों में आरटीई अंतर्गत दर्ज प्रति छात्र 50 हजार रुपये की पेनाल्टी वसूल करने की कार्यवाही की जावे।