भोपाल. अब MP में भी ज्ञानवापी जैसा विवाद छिड़ने के आसार पैदा हो गए हैं. भोपाल के चौक बाजार की जामा मस्जिद में शिव मंदिर होने का दावा किया गया है। संस्कृति बचाओ मंच ने यह दावा किया है. मंच का कहना है कि मस्जिद में शिव मंदिर है और इसका जिक्र उस किताब में भी है जो मंदिर तोड़ने वाली महिला शासक ने खुद लिखी थी। मस्जिद में मंदिर होने का जिक्र उर्दू की बुक 'हयाते कुदसी' में होने के आधार पर मामले में आज याचिका भी लगाए जाने की तैयारी की है। इस विवाद के बीच शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी ने जामा मस्जिद भोपाल रियासत कालखंड की होने का दावा किया है।

जामा मस्जिद राजधानी के व्यस्ततम इलाके चौक बाजार में है जोकि लाल रंग के पत्थरों से निर्मित है। इसका निर्माण भोपाल के नवाब परिवार की शासक कुदसिया बेगम ने करवाया था। दिल्ली की जामा मस्जिद की तरह ही यह मस्जिद भी चार बाग पद्धति पर आधारित है। मस्जिद के चारों कोनों पर 'हुजरे' बने हैं। तीन दिशाओं से यहां प्रवेश द्वार हैं। 

पहली महिला शासक थीं कुदसिया बेगम
कुदसिया बेगम भोपाल की शासक थीं जिन्हें पहली महिला शासक कहा जाता है। उन्होंने 18 वर्ष की उम्र में पति की हत्या के बाद सत्ता की बागडोर संभाली थी। उन्होंने पर्दा प्रथा का पालन करने से इनकार कर दिया था। उन्होंने भोपाल में जामा मस्जिद का निर्माण कराया था। हालांकि 'हयाते कुदसी' किताब में मस्जिद को मंदिर तोड़कर बनाने का जिक्र है। किताब के पेज नंबर 133 और 134 पर जिक्र है. जामा मस्जिद का वक्फ रजिस्ट्रेशन 1958 में कराया गया था। 

विवाद के बाद शहर काजी सैयद मुश्ताक अली नदवी, नायब काजी सैयद बाबर हुसैन नदवी, मुफ्ती अब्दुल कलाम कासमी, नायब मुफ्ती रईस अहमद कासमी आदि ने एक संयुक्त बयान जारी किया. इसमें कहा गया है कि जामा मस्जिद भोपाल रियासत के कालखंड की है। जामा मस्जिद प्रबंध कमेटी के पास इसके तमाम दस्तावेज भी मौजूद हैं। शहर काजी समेत सभी धार्मिक नेताओं, उलेमाओं का कहना है कि जामा मस्जिद को लेकर सोशल मीडिया पर अफवाहें फैलाई जा रही हैं। ये सरासर गलत और गुमराह करने वाली हैं। उन्होंने अवाम से अपील की कि सोशल मीडिया पर कोई पोस्ट या मैसेज डालने से परहेज करें। 

इधर जामा मस्जिद में शिव मंदिर होने का दावा करनेवाले संस्कृति बचाओ मंच ने सरकार से ज्ञानवापी मस्जिद की तर्ज पर यहां का सर्वे कराने की मांग की है। मंच के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि इस मस्जिद का निर्माण मंदिर को तोड़कर कराया था। कुदसिया बेगम ने खुद अपनी बुक में भी इसका उल्लेख किया है। इस मामले में कोर्ट में भी पिटीशन लगाने की ही हमारी तैयारी है। अभी तक इस मामले में औकाफे शाही कमेटी का आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं आया है।