स्वास्थ्य विभाग के चर्चित दवा खरीदी मामले में तत्कालीन स्वास्थ्य आयुक्त डाॅ. राजेश राजौरा, संचालक डॉ. योगीराज शर्मा, डॉ. अशोक विरांग एवं एमएम माथुर प्रशासकीय अधिकारी को बड़ी राहत मिली है। लोकायुक्त विशेष न्यायालय ने 10 जून को सभी अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी है।
दरअसल लोकायुक्त ने 2009 में तत्कालीन स्वास्थ्य आयुक्त डाॅ. राजेश राजौरा, संचालक डॉ. योगीराज शर्मा, डॉ. अशोक विरांग एवं एमएम माथुर प्रशासकीय अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। लोकायुक्त संगठन इस मामले की जांच के बाद प्रमाण के अभाव में वर्ष 2013 में खात्मा प्रस्तुत किया था
इसके बाद भोपाल विशेष न्यायालय ने वर्ष 2021 में खात्मा अस्वीकार करते हुए 5 बिंदुओं पर फिर से जांच करने के निर्देश दिये थे। लोकायुक्त संगठन ने पुन: गहन जांच कर खात्मा प्रस्तुत किया। जिसे लोकायुक्त विशेष न्यायालय ने 10 जून को स्वीकार करते हुए सभी अधिकारियों को क्लीन चिट दे दी है।
हालांकि इस मामले में लोकायुक्त में शिकायत किसी ने नहीं की थी। लोकायुक्त ने इस आधार पर प्रकरण दर्ज किया कि 0.75 ग्राम स्ट्रेप्टोमाइसिन इंजेक्शन जब भारत सरकार उपलब्ध कराती है तो मप्र स्वास्थ्य विभाग ने क्यों खरीदे?
जांच में पाया गया कि स्वास्थ्य विभाग ने 0.75 ग्राम की स्ट्रेप्टोमाइसिन नहीं, बल्कि 1.00 ग्राम स्ट्रेप्टोमाइसिन के इंजेक्शन खरीदे थे जो कि प्रसव के बाद इंफेक्शन रोकने के लिए दिए जाते हैं। जबकि भारत सरकार से मिलने वाले 0.75 ग्राम स्ट्रेप्टोमाइसिन टीबी इंफेक्शन रोकने दिया जाता है।