Gita Press: कांग्रेस नेता जयराम रमेश द्वारा ‘गीता प्रेस गोरखपुर’ को मिले ‘गांधी शांति पुरस्कार’ को लेकर दिए गए एक बयान पर कांग्रेस अब नाराज दिखाई दे रही हैं. दरअसल, गीता प्रेस गोरखपुर को साल 2021 के गांधी शांति पुरस्कार से सम्मानित किया गया है. जिसकी जयराम रमेश ने आलोचना की है, लेकिन अब कांग्रेस उनके इस ट्वीट से नाराज है.

बीजेपी नेताओं ने कहीं ये बड़ी बात-

फ़िलहाल, गीता प्रेस पर जारी विवाद के बीच अब बीजेपी नेताओं की तरफ से भी प्रतिक्रियां आनी शुरू हो गई हैं. केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने ट्वीट पोस्ट करते हुए लिखा, भारत की गौरवशाली प्राचीन सनातन संस्कृति और आधार ग्रंथों को अगर आज सुलभता से पढ़ा जा सकता है. तो इसमें गीता प्रेस का अतुलनीय योगदान है. 100 वर्षों से अधिक समय से गीता प्रेस रामचरित मानस से लेकर श्रीमद्भगवद्गीता जैसे कई पवित्र ग्रंथों को नि:स्वार्थ भाव से जन-जन तक पहुंचाने का अद्भुत कार्य कर रही है. गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार 2021 मिलना उनके द्वारा किये जा रहे इन भागीरथ कार्यों का सम्मान है.

इस पर बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने ट्वीट के ज़रिये लिखा कि गीता प्रेस, गोरखपुर को 'गांधी शांति पुरस्कार- 2021' से सम्मानित किए जाने पर हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं देता हूँ. भारत की गौरवशाली सनातन संस्कृति के संरक्षण व उत्कर्ष में पिछले 100 वर्षों का आपका योगदान प्रशंसनीय है. हमारे पवित्र ग्रंथों का वैश्विक प्रसार कर जो निस्वार्थ सेवा आपने की है यह हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है.

तो वहीं, जयराम रमेश के इस ट्वीट के ज़रिये मध्यप्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने कांग्रेस पर निशाना साधा हैं. उन्होंने कहा कि हमारे सनातन साहित्य के छपने का सबसे बड़ा केंद्र हैं गीता प्रेस. कांग्रेस को आपत्ति इसलिए हो सकती हैं क्योंकि वो (गीता प्रेस) गीता और रामायण ही सिर्फ छापती हैं. ये इनकी पीड़ा हो सकती हैं. ये कांग्रेस की तुष्टीकरण वाली सियासत हो सकती हैं. उन्होंने (गीता प्रेस) 100 साल में कभी कोई सम्मान लिया नहीं हैं और इसमें भी जो रकम का सम्मान है, उसे उनने लेने से मना किया है. लेकिन इसके बाद भी इनको (कांग्रेस) इससे आपत्ति हैं. ये सब देश समझता है कि इन्हें क्यों आपत्ति हैं?

क्या है पूरा मामला?

हाल ही में जयराम रमेश ने गीता प्रेस को गांधी शांति पुरस्कार देने का विरोध करते हुए लिखा, 2021 के लिए गांधी शांति पुरस्कार गोरखपुर में गीता प्रेस को प्रदान किया गया है. जो इस साल अपनी शताब्दी मना रहा है. अक्षय मुकुल द्वारा इस संगठन की 2015 की एक बहुत ही बेहतरीन जीवनी है. जिसमें वह महात्मा के साथ इसके तूफानी संबंधों और उनके राजनीतिक, धार्मिक और सामाजिक एजेंडे पर उनके साथ चल रही लड़ाइयों का पता लगाता है. यह फैसला वास्तव में एक उपहास हैं. साथ ही सावरकर और गोडसे को पुरस्कार देने जैसा है.

कांग्रेस ने जाहिर की नाराजगी-

ख़बरों की मानें तो अब इस ट्विट पर कांग्रेस ने भी नाराजगी जाहिर की हैं. कांग्रेस के एक सीनियर नेता ने गीता प्रेस को लेकर जयराम रमेश के बयान को गैर जरूरी बताया. उन्होंने कहा, हिन्दू धर्म के प्रचार प्रसार में गीता प्रेस की बड़ी भूमिका रही है. जयराम रमेश को ऐसा बयान देने से पहले विचार करना चाहिए.

क्या है गांधी शांति पुरस्कार?

बता दें कि गांधी शांति पुरस्कार केंद्र सरकार की तरफ से स्थापित एक वार्षिक पुरस्कार है. जिसकी शुरुआत साल 1995 में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 125वीं जयंती के अवसर पर उनके आदर्शों के प्रति श्रद्धांजलि के रूप में हुई थी. गीता प्रेस दुनिया में सबसे बड़े प्रकाशकों में से एक है, जिसकी स्थापना साल 1923 में हुई थी.

अब तक गीता प्रेस ने 14 भाषाओं में 41.7 करोड़ किताबों का प्रकाशन किया है. जिसमें करीब 16.21 करोड़ पुस्तकें सिर्फ श्रीमद भगवद गीता की शामिल हैं. साथ ही इस संस्था ने प्रकाशनों के लिए कभी भी विज्ञापन नहीं लिए हैं. यहां तक की इस बार मिलने वाले गांधी शांति पुरस्कार के साथ ही गीता प्रेस को एक करोड़ रुपये की राशि से सम्मानित भी किया जाना था. लेकिन गीता प्रेस के प्रबंधक डॉ. लालमनी तिवारी के मुताबिक, गीता प्रेस मैनेजमेंट ने एक करोड़ की सम्मान राशि स्वीकार करने से इनकार कर दिया है.