दिल्ली—मुंबई—चेन्नई का सफर अब और कम समय में पूरा हो जाएगा. इस ट्रैक पर भोपाल और इटारसी के बीच तीसरी लाइन बन जाने के बाद यह सुविधा मिलने लगेगी. तीसरी लाइन का काम तेजी से चल रहा है. बाघ-तेंदुए जैसे वन्‍य प्राणियों की जान बचाने के लिए तीसरी लाइन में ट्रैक के नीचे 22 रेल अंडरपास बनाए जा रहे हैं. इनका करीब 95 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। ट्रैक के ऊपर बनाए जाने वाले चार ओवरपास की डिजाइन को भी रेलवे ने अनुमति दे दी है। यह काम करीब एक वर्ष में पूरा किया जाएगा। रातापानी वन्यजीव अभयारण्य से गुजरने वाले ट्रैक पर बरखेड़ा से बुधनी के बीच किए ये काम तेजी से किए जा रहे हैं। 

इस ट्रैक पर बीते 20 वर्षों में 7 बाघ, 13 तेंदुए समेत 50 से अधिक वन्यप्राणियों की मौत हो चुकी है। यही कारण है कि तीसरी लाइन के निर्माण में वन्य प्राणियों को बचाने पर सबसे ज्यादा जोर दिया जा रहा है. भोपाल से इटारसी के बीच बरखेड़ा-बुदनी रेलखंड रातापानी वन्यजीव अभयारण्य का हिस्सा है। 

यहां पूर्व से दो ट्रैक हैं। नया तीसरा ट्रैक भी बनाया जा रहा है। नई दिल्ली से चेन्नई या मुंबई के लिए यह सरल मार्ग है. इटारसी से दोनों दिशाओं यानि मुंबई या चेन्नई सहित दक्षिण में जाने के अलावा जबलपुर होते हुए उत्तरप्रदेश या बिहार जाने के लिए भी सुविधा मिल जाती है. इस रेल मार्ग पर यातायात का दबाव अधिक है. तीसरी रेल लाइन के निर्माण के बाद इस दबाव से बहुत हद तक मुक्ति मिल जाएगी. 

मप्र वाइल्ड लाइफ बोर्ड ने यहां इसी शर्त पर निर्माण की अनुमति दी कि वन्यप्राणियों के लिए ट्रैक पार करने की समुचित व्यवस्था की जाए। तय हुआ कि अंडरपास व ओवरपास बनाए जाएंगे। नया ट्रैक बिछाने के साथ ही अंडरपास का काम चालू कर दिया गया था, जोकि अब बनकर तैयार हो गए हैं। बरखेड़ा से बुधनी के बीच तीसरी रेल लाइन पांच सुरंगों से होकर गुजरेगी। सभी पांच सुरंगें पूरी हो चुकी हैं। अब इनके अंदर पटरी बिछाई जा रही है। भोपाल रेल मंडल के अधिकारी बताते हैं कि तीसरी रेल लाइन का काम तेजी से पूरा करवा रहे हैं। अंडरपास लगभग 95 प्रतिशत बना दिए गए हैं, ओवरपास भी तय सीमा में बनाने को कहा है।