भोपाल: प्रदेश में रामपथ गमन अंचल विकास के लिये गत 9 मार्च को संस्कृति विभाग के अंतर्गत बजट का प्रावधान किया परन्तु संस्कृति विभाग यह कार्य कर सके, इसके लिये कार्य आवंटन नियमों में बदलाव दो माह बाद किया गया है।

उल्लेखनीय है कि वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में रामपथ गमन अंचल विकास के लिये अध्यात्म विभाग के अंतर्गत 30 करोड़ 73 हजार रुपयों का बजट प्रावधान किया गया था तथा इसके लिये अध्यात्म विभाग ने एमपीआरडीसी को 50 लाख रुपये देकर डीपीआर बनाने का काम सौंप दिया था।

एमपीआरडीसी ने इसके लिये टेण्डर भी जारी कर दिये थे परन्तु मुख्य सचिव इकबाल सिंह की आपत्ति पर ये टेण्डर निरस्त कर दिये गये क्योंकि रामपथ के बीच में आने वाले धर्मस्थलों के लिये विकास योजना में प्रावधान नहीं था। इसके बाद निर्णय लिया गया कि अध्यात्म विभाग का नाम धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग किया जाये तथा रामपथ गमन अंचल विकास का काम संस्कृति विभाग को सौंपा जाये।

पहले तय हुआ कि संस्कृति विभाग का ओकारेश्वर में आदि शंकराचार्य की विशाल प्रतिमा एवं सांस्कृतिक केंद्र बना रहे आचार्य शंकर न्यास यह काम करेगा परन्तु फिर तय किया गया कि अलग से इसका एक ट्रस्ट बनाया जाये।

इधर संस्कृति विभाग के वर्तमान बजट में रामपथ के लिये 30 करोड़ 1 लाख 5 हजार रुपयों का बजट प्रावधान कर दिया गया और पौने दो माह बाद सामान्य प्रशासन विभाग ने कार्य आवंटन नियमों में संशोधन कर रामपथ गमन अंचल विकास का काम धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग से वापस लेकर संस्कृति विभाग को सौंप दिया। दिलचस्प बात यह है कि रामपथ गमन अंचल विकास के लिये धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग के वर्तमान बजट में भी शीर्ष शामिल है परन्तु उसमें कोई राशि नहीं रखी गई है।