कांग्रेस नेता राहुल गांधी की संसद से सदस्यता रद्द होने पर केंद्रीय जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा, पिछले कुछ दिनों से देश में एक विवाद खड़ा करने की कोशिश हो रही है. कुछ ऐसे नेता जिनके लिए गांधी परिवार क़ानून-संविधान से ऊपर है वो हाहाकार मचा रहे हैं. पिछले कुछ दिनों से लगातार विवादों को जन्म देने की 'कोशिश' की जा रही है. राहुल गांधी आदतन अपराधी की तरह काम करते रहे हैं.
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सदस्यता रद्द होने के बाद से शुरू हुए कांग्रेस के विरोध प्रदर्शन पर शेखावत बोले, कुछ नेता, जिनके लिए गांधी परिवार कानून और संविधान से ऊपर है, सदन से उनकी अयोग्यता के फैसले पर हंगामा कर रहे हैं. हर बार की गई गलती से बड़ी गलती करना और न्यायालय के द्वारा मौका दिए जाने के बाद भी उसका अनादार करना यह स्पष्ट करता है कि कांग्रेस पार्टी और इसके नेताओं का ना संविधान और ना ही संवैधानिक संस्थाओं में कोई विश्वास बचा है.
राहुल गांधी पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा, अगर राहुल गांधी ने एक बार गलती की होती तो देश उन्हें माफ कर देता. लेकिन उनका लगातार इस तरह की गलतियां करना जनता के प्रति, देश के प्रति उनके अनादर का प्रदर्शन है. इसके अलावा यह शर्मनाक है कि वह अहंकार और 'अभिमान' में इतना डूबा हुआ है कि उसने अदालत द्वारा मौका दिए जाने पर भी माफी मांगने का मौका नहीं लिया.
कांग्रेस के बयानों का जिक्र करते हुए शेखावत बोले, लोकसभा अध्यक्ष के फ़ैसले के बाद जिस तरह की टिप्पणी की गई, जो अमर्यादित बातें की गईं निश्चित रूप से ये उनका अहंकार दिखलाता है. गांधी परिवार class apart है यह परिलक्षित हुआ है. इस तरह की टिप्पणियों से ना केवल उन्होंने संविधान का अपमान किया है बल्कि ऐसे लोग जो चौराहे पर खड़े होकर ‘लोकतंत्र खतरे में है’ की दुआई देते हैं उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था का भी अपमान किया है.
सावरकर को देशभक्त बताते हुए शेखावत बोले, राहुल गांधी ने महान देशभक्त वीर सावरकर का अपमान किया है और इस स्वतंत्रता सेनानी और उनके बलिदान से प्रेरणा लेने वाले लोगों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है. राहुल गांधी ने बहुत सही कहा कि वह सावरकर नहीं थे. अगर राहुल वास्तव में सावरकर को जानना चाहते हैं, तो उन्हें अंडमान जेल जाना चाहिए और वहां समय बिताना चाहिए ताकि यह महसूस किया जा सके कि सावरकर वास्तव में कौन थे, उनके बलिदान क्या थे.
उन्होंने आगे कहा कि देश को बदनाम करने का कोई अवसर राहुल गांधी छोड़ना नहीं चाहते और लोकतंत्र के सभी स्तंभों को चुनौती देकर खुद को उन से ऊपर दिखाने का प्रयास करते हैं. अपने आप को व्यवस्था से ऊपर समझने वाले ऐसे लोग निश्चित रूप से लोकतंत्र के लिए खतरे के समान हैं.