पाकिस्तान से लौटी गीता की अपने असली परिवार को लेकर खोज आखिरकार पूरी हो गई। महाराष्ट्र के परभणी में गीता को परिवार मिला गया है। मध्यप्रदेश रेलवे पुलिस ने गीता के संकेतों के आधार पर उनके परिजनों की तलाश में अहम भूमिका निभाई। मंगलवार को भोपाल आकर गीता, उसकी मां और बड़ी बहन ने जीआरपी को धन्यवाद दिया।
भोपाल के भदभदा स्थित रेलवे पुलिस मुख्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीआरपी ने बताया कि गीता मूलत: महाराष्ट्र के परभणी की रहने वाली है, उसका असली नाम राधा है। परिवार में मां मीना पंडारे और शादीशुदा बहन पूजा है। गीता का परिवार मार्च 2021 में मिल गया था, तब से वह परिवार के साथ रह रही है लेकिन तब कोरोना के प्रकोप के चलते सार्वजनिक कार्यक्रम नहीं हो सका था।
गीता के इंटरप्रेटर ने मीडिया के सामने उनकी बात रखते हुए बताया कि अब गीता उर्फ राधा मंगलवार को परिवार के साथ भोपाल के भदभदा स्थित रेलवे पुलिस मुख्यालय पहुंची और परिवार से मिलाने की मुहिम में शामिल जीआरपी समेत सभी व्यक्तियों और संस्थाओं को धन्यवाद दिया। गीता ने मध्यप्रदेश रेलवे के आईजी और अधिकारियों को सैल्यूट करते हुए धन्यवाद पत्र दिया। साथ ही गीता का परिवार भी इस मौके पर भावुक नज़र आया।
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दरअसल गीता ने बताया था कि उसका घर रेलवे ट्रेक के पास है। घर के पास एक मंदिर है और एक तालाब है, यहां लोग आते-जाते रहते हैं। स्टेशन का नाम पूछने पर बताया था कि स्टेशन का नाम हिंदी में है लेकिन क्या है वह याद नहीं आ रहा। इसके बाद से ही जीआरपी गीता के घर और परिजनों के तलाश में एक्टिव हो गई थी।
गौरतलब है कि गीता बचपन में गलती से रेल में सवार होकर सीमा लांघने के कारण करीब 20 साल पहले पाकिस्तान पहुंच गई थी। पाकिस्तानी रेंजर्स ने गीता को लाहौर रेलवे स्टेशन पर समझौता एक्सप्रेस में अकेले बैठा हुआ पाया था। उस समय उसकी उम्र आठ साल के आस-पास रही होगी। मूक-बधिर गीता को पाकिस्तान की सामाजिक संस्था ईधी फाउंडेशन की बिलकिस ईधी ने गोद लिया और अपने साथ कराची में रखा था। तत्कालीन विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के विशेष प्रयासों के कारण गीता 26 अक्टूबर 2015 को स्वदेश लौट सकी थी। इसके अगले ही दिन उसे इंदौर में एक गैर सरकारी संस्था के आवासीय परिसर में भेज दिया गया था।