भोपाल: प्रदेश में तेंदूपत्ता के संग्रहण एवं उसके विक्रय का अधिकार ग्राम सभा को इस साल नहीं मिल पायेगा। अगले साल के सीजन में इस अधिकार को दिया जा सकेगा।
ज्ञातव्य है कि वर्तमान में तेंदूपत्ता राष्ट्रीयकृत वनोपज है तथा इसके संग्रहण एवं विक्रय का कार्य राज्य के वन विभाग के अंतर्गत कार्यरत लघुवनोपज संघ अपनी जिला यूनियनों एवं प्राथमिक समितियों के माध्यम से किया जा रहा है। चूंकि पैसा एक्ट के तहत ग्राम सभाओं को लघु वनोपजों पर अधिकार दिया जाना है, इसलिये इसके लिये मंत्रालय स्तर पर कार्यवाही प्रारंभ हुई।
चूंकि तेंदूपत्ता के संग्रहण एवं विक्रय का कार्य महाराष्ट्र जैसे अन्य राज्यों में ग्राम सभाओं को दिया गया था परन्तु वह वहां फेल रहा। इसी कारण से मप्र में इसका अधिकार देने के लिये हिचकिचाहट हो रही है। फिर भी मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने पायलट प्रोजेक्ट के तहत बैतूल जिले की घोड़ाडोंगरी विधानसभा क्षेत्र की शहपुरा ग्रामसभा को इसका अधिकार देने के निर्देश दिये हैं।
लेकिन वन विभाग की समस्या यह है कि वर्तमान में तेंदूपत्ता संग्रहण के लिये गोदाम आदि के ठेके लघु वनोपज संघ एवं उसकी जिला व प्राथमिक समितियों के माध्यम से दिये जा चुके हैं। ऐसे में शाहपुरा ग्राम सभा को इस सीजन में यह कार्य नहीं दिया जा सकता है। अगले साल के सीजन में ही यह कार्य ग्राम सभा को दिया जा सकेगा।
उल्लेखनीय है तेंदूपत्ता के संग्रहण एवं विक्रय से लघु वनोपज संघ हर साल सात सौ से आठ सौ करोड़ रुपये अर्जित करता है तथा इसका ज्यादतर अंश संग्रहाकों को जोकि वनवासी होते हैं, बोनस के रुप में भुगतान कर दिया जाता है। चूंकि इस पर पूरा नियंत्रण एवं निगरानी वन विभाग की रहती है इसलिये इसमें बहुत कम गड़बड़ी हो पाती है।