मौसम विभाग के अनुसार, बिपार्जॉय 13 जून, 2023 को 2 बजे पोरबंदर से लगभग 290 किमी दक्षिण-पश्चिम और सुबह 3 बजे जखाऊ बंदरगाह से 360 किमी दक्षिण-दक्षिण पश्चिम में उत्तर-पूर्व और मध्य-पूर्व मध्य अरब सागर के ऊपर केंद्रित था। जो अब तेजी से आगे बढ़ रहा है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह आज दोपहर दिल्ली चक्रवात 'बिपरजॉय' की तैयारियों को लेकर एक समीक्षा बैठक करने जा रहे हें। बैठक में गृहमंत्री की अध्यक्षता में गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और प्रभावित होने वाले 8 जिलों के सांसद भी वर्चुअल रूप से बैठक में भाग लेंगे।
अरब सागर में बना चक्रवाती तूफान बिपरजॉय तेजी से भारत के तटीय इलाकों की ओर बढ़ रहा है। अरब सागर से सटे सभी राज्यों (गुजरात, महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, केरल) में अभी से अपना असर दिखाना शुरू कर दिया है। केरल, कर्नाटक और गोवा के बाद महाराष्ट्र के मुंबई समेत कई शहरों में बारिश और तेज हवाएं चलनी शुरू हो गई हैं।
गुजरात के सौराष्ट्र और कच्छ तट पर भी तेज हवाएं चल रही हैं। जामनगर और मुंबई में हाई टाइड देखने को मिल रहा है। समुद्र में ऊंची-ऊंची लहरें उठ रही हैं। इसे ध्यान में रखते हुए इन राज्यों के तटीय इलाकों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। वहीं, राजस्थान के कुछ हिस्सों में बारिश के रूप में भी इसका असर देखा जा सकता है।
चक्रवाती तूफान बिपरजोय के आगे बढ़ने से हवा की गति बढ़ेगी। इससे पेड़ों के गिरने और बिजली और फोन लाइनों को नुकसान पहुंचने की संभावना है। साथ ही निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है। आईएमडी के अनुसार, बिपार्जॉय के 15 जून को सौराष्ट्र और कच्छ के तटीय क्षेत्रों को पार करने की संभावना है।
सम पूर्वानुमान एजेंसी के मुताबिक, स्काईमेट, महुवा, पोरबंदर, ओखा, दीव, सोमनाथ, जामनगर, द्वारका आदि तटीय इलाकों और भुज, मांडवी, नलिया आदि में कुछ जगहों पर भारी बारिश हो सकती है। आपको बता दें कि गुजरात और राजस्थान में आमतौर पर जून के पहले पखवाड़े के दौरान गर्मी और धूल भरी आंधी चलती है। राज्यों में बहुत कम वर्षा होती है, इसलिए इस वर्षा को बेमौसम वर्षा कहा जाएगा।
आईएमडी ने भविष्यवाणी की है कि चक्रवात 15 जून की शाम तक जखाऊ बंदरगाह के पास सौराष्ट्र और कच्छ को पार कर सकता है। गुजरात सरकार तटीय क्षेत्रों में हमले की संभावना को ध्यान में रखते हुए तटीय क्षेत्रों में एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को तैनात कर रही है। वहीं, संभावित प्रभावित राज्यों के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है। साथ ही समुद्र के पास न जाने की सलाह दी है।