भोपाल: राज्य के जल संसाधन विभाग ने सभी मैदानी अधिकारियों को इस साल आने वाले वर्षाकाल में अति-वर्षा एवं बाढ़ की स्थिति से निपटने हेतु पूर्व तैयारी के निर्देश जारी किये हैं। विभाग ने कहा है कि वर्ष 2016 में टोन्स नदी के कैचमेंट में अधिक वर्षा के कारण सतना/रीवा क्षेत्र में बाढ़ की स्थिति निर्मित हुई थी। साथ ही वर्ष 2019 एवं 2020 में अतिवर्षा के कारण विशेषत: गांधी सागर बांध एवं नर्मदा कछार में उत्पन्न स्थिति से भी विभाग अच्छे से अवगत है। टोन्स नदी में वर्षाकाल के दौरान बांधों के संचालन के कारण बाढ़ की स्थिति निर्मित नहीं होनी चाहिए। इस हेतु पूर्व में एक कार्य योजना बनाई गई है। मुख्य अभियंता इस कार्य योजना का पुन: आंकलन करें ताकि बाढ़ की स्थिति निर्मित न हो।
विभागीय निर्देश में कहा गया है कि सभी मैदानी कार्यपालन यंत्री, मानसून काल के दौरान अपने मुख्यालय में रहेंगे। कार्यपालन यंत्री का दायित्व होगा कि अपने जिले/क्षेत्र के अंतर्गत स्थित परियोजनाओं के अधिकारियों के माध्यम से बाढ़ की स्थिति, बाढ़ चेतावनी, फ्लड डिस्चार्ज की लगातार निगरानी करेंगे एवं संभावित अतिवर्षा एवं बाढ़ की पूर्व संभावना से राज्य स्तरीय कंट्रोल रूम को ई-मेल/दूरभाष द्वारा तथा विभाग के उच्चाधिकारियों एवं कलेक्टर/पुलिस अधीक्षक या अन्य संबंधित जिला/स्थानीय अधिकारियों को समय-समय पर अवगत कराएंगे। कार्यपालन यंत्री एक कंट्रोल रूम स्थापित कर त्वरित कार्यवाही दल के द्वारा कहीं भी संभावित बाढ़ व बाढ़ चेतावनी जारी करने की कार्यवाही करेंगे। जल भराव तथा समय-समय पर जल निकासी का कार्य सुनिश्चित किया जाए, जिससे बांध से जल निकासी के कारण निचले क्षेत्रों में बाढ़ की स्थिति निर्मित न हो। मोहनपुरा बांध का एफआरएल 398 मीटर है। जलाशय के अपस्टठ्रीम साईड में 2.70 किलोमीटर गुना-मक्सी रेलवे लाइन के डूब में आने वाले भाग में रेल लाइन शिफ्टिंग का कार्य पूर्ण नहीं हुआ है, इसलिये बांध के गेटों का परिचालन इस प्रकार हो कि रेलवे लाइन के खतरे के निशान तक जल स्तर न पहुंचे।