संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष ने अपने आंकड़े जारी किए हैं। जिसे देखने पर पता चलता है, कि भारत की जनसंख्या चीन की तुलना में 2.9 मिलियन अधिक बढ़ गई है। इसके साथ ही भारत दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन गया है। भारत में 68 प्रतिशत लोग 15 से 64 वर्ष के आयु वर्ग में हैं। यूएन ने यह दावा पिछले साल ही किया था।

जनसंख्या के मामले में भारत ने चीन को भी पीछे छोड़ दिया है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार भारत अब दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन गया है। भारत की आबादी 142.86 करोड़ हो गई है जबकि चीन की आबादी 142.57 करोड़ है। 1950 के बाद यह पहली बार है जब भारत की जनसंख्या चीन से आगे निकल गई है। संयुक्त राष्ट्र ने पिछले साल भविष्यवाणी की थी कि भारत अगले साल जनसंख्या के मामले में चीन को पीछे छोड़ देगा।

इस संबंध में NFPA  की 'द स्टेट ऑफ वर्ल्ड पॉपुलेशन रिपोर्ट, 2023' ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट जारी की है। रिपोर्ट का शीर्षक '8 बिलियन लाइव्स, इनफिनिट पॉसिबिलिटीज: द केस फॉर राइट्स एंड चॉइस' है। ये आंकड़े 'जनसांख्यिकीय संकेतक' की श्रेणी के तहत दिए गए हैं।

UANFPA की मीडिया सलाहकार अन्ना जेफ्रीस ने कहा, "हां, यह स्पष्ट नहीं है कि भारत कब चीन से आगे निकल गया।" जेफरी ने कहा, "दोनों देशों की तुलना करना वास्तव में कठिन है।" क्योंकि दोनों देशों के डेटा कलेक्शन में कुछ अंतर है। उन्होंने कहा कि इस रिपोर्ट से साफ है कि चीन की आबादी पिछले साल चरम पर थी और अब घटनी शुरू हुई है।

वहीं, वर्तमान में भारत की जनसंख्या बढ़ रही है। हालाँकि, भारत की जनसंख्या वृद्धि दर भी 1980 के बाद से घट रही है। इसका अर्थ है कि भारत की जनसंख्या तो बढ़ रही है लेकिन इसकी दर अब पहले से कम है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की 25 फीसदी आबादी 0 से 14 साल के बीच है। इसके अलावा 18 फीसदी लोग 10 से 19 साल की उम्र के हैं। 10 से 24 वर्ष के आयु वर्ग के लोगों की संख्या 26 प्रतिशत है। वहीं, 15 से 64 साल के लोगों की संख्या 68 फीसदी और 7 फीसदी 65 साल से ऊपर के हैं। चीन के लिए, 17% 0 से 14 वर्ष के बीच हैं, 12% 10 से 19 वर्ष के हैं, 10 से 24 वर्ष 18% हैं, 15 से 64 वर्ष 69% हैं और 65 से अधिक 14% हैं।

अमेरिकी सरकार की एक रिपोर्ट के अनुसार 18वीं शताब्दी में जनसंख्या लगभग 120 मिलियन रही होगी। 1820 में भारत की जनसंख्या लगभग 13.40 करोड़ थी। 19वीं शताब्दी तक भारत की जनसंख्या 23 करोड़ के आंकड़े को पार कर चुकी थी। 2001 में भारत की जनसंख्या 100 करोड़ को पार कर गई। वर्तमान में भारत की जनसंख्या लगभग 140 करोड़ है। 2050 तक भारत की आबादी करीब 166 करोड़ होगी।

भारत में जनसंख्या वृद्धि के तीन मुख्य कारण हैं। पहला, शिशु मृत्यु दर में गिरावट का मतलब है कि एक साल से कम उम्र के बच्चों की मौत में कमी आ रही है। दूसरा- नवजात मृत्यु दर यानी 28 दिन तक के बच्चों की मौत में कमी आई है। और तीसरा, 5 साल से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर कम होने का मतलब है कि पांच साल से कम उम्र के बच्चों की मौत की संख्या कम हो रही है।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की स्वास्थ्य प्रबंधन सूचना प्रणाली (एचएमआईएस) की 2021-22 की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में शिशु मृत्यु दर, नवजात मृत्यु दर और 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में कमी आ रही है।